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Tuesday, Jun 2, 2026
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‘राजनीति’ को समाज सेवा का माध्यम बनाया था ‘सतीश चन्द्र गुप्त विभव’ ने

पूर्व विधायक सतीश चन्द्र गुप्त की पुण्य तिथि पर विशेष
आपातकाल में जब तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की आलोचना हो रही थी, तब उनकी सोच को लेकर जनता के बीच जाने का साहस दिखाया था ‘विभव’ ने

सत्येन ओझा.द बीट्स न्यूज
आगरा। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पूर्व सदस्य रहे सतीश चन्द्र गुप्ता ‘विभव’ (पूर्व विधायक) एक समर्पित एवं निष्ठावान राजनेता ही नहीं रहे, बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी दूरदृष्टि समाज के बहुत काम आई। आज के दौर में ‘राजनीति’ क्षणिक व निजी लाभ के इर्द गिर्द सिमटती जा रही है, इस दौर में राजनीति करने वालों के लिए पूर्व विधायक सतीश चन्द्र गुप्ता ‘विभव’ के जीवन दर्शन को जान लेना बहुत जरूरी है।देश में आपातकाल के दौरान जब विपक्षी पार्टियों के नेताओं को जेल में डाला जा रहा था,देश में हर तरफ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसले की आलोचना हो रही थी, तब आगरा के नेताओं में सतीश चन्द्र गुप्ता विभव ऐसे नेता थे जो इंदिरा गांधी के फैसले को सच साबित करने के लिए लोगों के बीच खुलकर उतरे, उन्होंने छोटी छोटी बैठकों के माध्यम से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सोच को लोगों को समझाने का प्रयास किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री का फैसला कितना सही था, कितना गलत ये अलग बात है। लेकिन जब देश भर में किसी प्रधानमंत्री की आलोचन हो रही हो, तब उनकी सोच को जनता के बीच में सही साबित करने का सतीश चन्द्र गुप्ता विभव का फैसला साहसिक व पार्टी के प्रति निष्ठा का प्रतीक था।जनता के बीच वे अपनी बात को कहने के लिए अपने साथ उस समय कांग्रेस के नेता व तीन बार लगातार आगरा से सांसद रहे निहालसिंह, पूर्व विधायक आजाद कुमार कर्दम, पूर्व विधायक ओपी जिंदल को भी हर बैठकों में साथ रखते थे। चूंकि सतीश चन्द्र गुप्ता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे एवं कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में शुमार रहे नारायण दत्त तिवारी के काफी करीब होने के कारण कांग्रेस में बड़े नेताओं को भी सतीश चन्द्र विभव की बात पर अमल करना पड़ता था। राजनीति में बेदाग नेता रहे सतीश चन्द्र गुप्ता विभव की सोच हमेशा राजनीति के माध्यम समाज की बेहतरी की रही। समाज में आ रहे बदलाव को वे बहुत पहले ही भांप लेते थे। आगरा में पूर्व नियोजित ढंग से बसायी गई पॉश कॉलोनी ‘विभव नगर’ उस समय उत्तर प्रदेश की शायद पहली नियोजित कॉलोनी थी, कालांतर में नियोजित ढंग से कॉलोनियां बसाने का प्रचलन काफी तेजी के साथ शुरू हुआ, आज तो किसी भी शहर का मूल आधार ही कॉलोनियां बन चुकी हैं। हालांकि आज आगरा में प्राईवेट कॉलोनियों का जाल फैल चुका है, लेकिन ‘विभव नगर’ आज भी सबसे अलग है, पानी सीवरेज, पार्किंग, चौड़ी सड़कें आज भी ‘विभव नगर’ को सबसे अलग बनाती हैं। समाज के प्रति सतीश चन्द्र विभव का सोच व निजी जिंदगी में ईमानदारी व समर्पण का ही परिणाम था कि उनके आगरा के प्रमुख व्यवसायी बेटे डॉ.सुशील गुप्ता ने अपने पिता की समाज के प्रति सोच को आगे बढ़ाकर पिता के मान को और ज्यादा बढ़ाया है। प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल जैसी आगरा की प्रमुख शिक्षण संस्था में कैरियर के साथ करेक्टर निर्माण का सपना जो इस स्कूल के माध्यम से पूरा किया जा रहा है, यह सोच कहीं न कहीं सतीश चन्द्र विभव की समाज के प्रति जिम्मेदारी की सोच को आगे बढ़ाती है। 26 दिसंबर को आगरा में जब उनकी पुण्य तिथि मनायी जा रही होगी, तब उनका ये सोच तमाम राजनेताओं व समाजशास्त्रियों को भविष्य की नई राह दिखा सकता है।

द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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