चंडीगढ़ से आए फोन कॉल के बाद मार्केट को जेसीबी की मदद से ध्वस्त करने जा रही टीम ने पीछे खींचे कदम
द बीट्स न्यूज
मोगा। मीट मार्केट में नगर निगम की एक करोड़ से ज्यादा की जमीन पर कब्जा कर वहां तीन दुकानों की नई मार्केट तैयार करने वाले को बचाने वाला आखिरकार चंडीगढ़ का कौन प्रभावशाली व्यक्ति है, जिसके एक फोन कॉल के बाद नगर निगम की जेसीबी सहम गई, अवैध बिल्डिंग को ध्वस्त करने के लिए नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच की टीम पीछे लौट गई। जेसीबी के साथ पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन एक फोन कॉल के बाद अधिकारियों को पीछे लौटना पड़ा था। निगम की रेंट ब्रांच व बिल्डिंग ब्रांच में अवैध बिल्डिंग का मामला सरकारी रिकार्ड में है, लेकिन अवैध रूप से निगम की जगह में बनाई बिल्डिंग को ध्वस्त करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
गौरतलब है कि करीब चार महीने पहले रेलवे रोड पर बिनबेन के पिछले हिस्से में बनी पुरानी मीट मार्केट में एक व्यक्ति ने नगर निगम की जमीन पर कब्जा कर वहां निजी स्तर पर तीन दुकानों की एक पूरी मार्केट ही खड़ी कर दी है। इस मामले में नगर निगम की बिल्डिंग की शुरूआत के समय ही जानकारी मिल गई थी। इस जानकारी के बाद नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से सहमति लेकर तीन महीने पहले बिल्डिंग को ध्वस्त करने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए निगम की टीम के सदस्यों ने अपने साथ जेबीसी मशीन भी साथ में ले ली थी। इस बात की जानकारी जब मीट मार्केट में निगम की दुकानों पर कब्जा कर अवैध मार्केट बनाने वाले को लगी तो उसने अपने राजनीतिक संबंधों का प्रयोग किया। इसके बाद चंडीगढ़ से राजनीति से संबंध रखने वाले एक बड़ी हस्ती का फोन आया, इस फोन कॉल के बाद जेसीबी मशीन के खतरनाक जबड़े सहम गए, निगम के अधिकारियों की हिम्मत नहीं हुई कि मौके पर जाकर बिल्डिंग ध्वस्त कर सकें। मीट मार्केट में बनी ये अवैध बिल्डिंग चर्चाओं में है, कि आखिरकार ऐसा कौन मीट का शौकीन है, जिसने नगर निगम करीब एक करोड़ से ज्यादा की जमीन ही दांव पर लगा दी, और उस पर अवैध रूप से बनी मार्केट ही ध्वस्त होने से बचा ली। इस पूरे मामले में नगर निगम के अधिकारी मौन धारण किये हैं। हालांकि रेंट ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को लिखित सूचना दे दी है। बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारी इस मामले में बोलने को तैयार नहीं है। इसके पीछे सूत्रों का कहना है कि इस अवैध बिल्डिंग को ध्वस्त होने से बचाने के लिए सरंक्षण एक बड़े नेता कर रहे हैं, उन्हीं को चंडीगढ़ से फोन आया था। उसके बाद निगम के अधिकारियों ने कार्रवाई टाल दी थी।
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