पर्दे के पीछे गेम प्लान करने वालों ने मंझदार में फंसाया कुछ पार्षदों को, प्रत्याशी भी तय नहीं
सत्येन ओझा (द बीट्स न्यूज)
मोगा। नगर निगम के मेयर पद का चुनाव 19 जनवरी की दोपहर 2 बजे होगा। चुनाव जिला प्रबंधकीय काम्पलेक्स के सभागार में मंडलायुक्त फिरोजपुर की मौजूदगी में होगा। मेयर पद के चुनाव से एक दिन पहले तक जो समीकरण बनते दिख रहे हैं, उसमें कानूनी लड़ाई जीतने वालों को चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ सकता है। देर शाम तक वे अपने मेयर पद के प्रत्याशी के नाम पर भी एकमत नहीं सके थे। ऐसे में मेयर पद एक बार फिर आम आदमी पार्टी की झोली में जाना तय माना जा रहा है।
गौरतलब है कि नगर निगम के चुनाव को जब सिर्फ चार से साढ़े चार महीने बाकी हैं, ऐसे समय में मेयर पद के चुनाव की लड़ाई छेड़ने वाले पार्षदों का सोच था कि शहर की राजनीति में जिस प्रकार के समीकरण बनते जा रहे थे, उसमें आम आदमी पार्टी के प्रति लोगों का मोह झुकाव कम होता रहा था, ये सही भी था लेकिन पर्दे के पीछे रणनीति बनाने वालों ने पूरी लड़ाई गलत दिशा में मोड़ दी, उसी का नतीजा है कि विद्रोही पार्षद जिन्हें हराने के लिए निकले थे, उन्हीं को 19 जनवरी को जीतते हुए देखने को मजबूर हो सकते हैं।
मेयर बलजीत सिंह चानी के मेयर पद से इस्तीफे के बाद हमेशा पर्दे के पीछे गेम खेलने वाले लोगों ने कुछ पार्षदों को उकसाने का काम किया। वे अपनी रणनीति में तो सफल हो गये लेकिन जो पार्षद इस चंगुल में फंस गये उन्हें शुरू में तो अपनी विजय दिख रही थी, उन्हें लग रहा था कि आम आदमी पार्टी या तो चुनाव टालने की कोशिश करेगी या फिर अपने पार्षदों को चुनाव बैठक में जाने से रोक देगी, जिससे बैठक का कोरम पूरा न होने पर चुनाव टल जाएंगे, तब तक निगम का बाकी कार्यकाल पूरा हो जाएगा। इन दोनों ही परिस्थितियों के लिए चुनाव की लड़ाई लड़ने वालों ने अपनी रणनीति बना ली थी, उनका सोच था कि आम आदमी पार्टी को समर्थन करने वाले पार्षद बहिष्कार कर वे बैठक में जाएंगे, इसलिए दो तिहाई यानि सिर्फ 17 पार्षद ही अपना मेयर बनाने में सफल हो जाएंगे। लेकिन ये रणनीति काम नहीं आई। विधायक डॉ.अमनदीप कौर अरोड़ा पूरी तरह आश्वस्त थीं कि मेयर उनका ही बनेगा। इसकी कई वजह भी थीं कि पाले बदलने वाले पार्षद वो किसी भी दल के क्यों न हों, जिस तरह के लाभ वे निजी स्तर पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर ले चुके हैं, अगर उन्होंने पासा पलटा तो वे खुद भी कानूनी दावपेंच में फंस सकते हैं, जो समीकरण बनते दिख रहे हैं, उनमें हाल ही में मेयर पद से इस्तीफा देने वाले बलजीत सिंह चानी का भी वोट विद्रोही पार्षदों अपने पक्ष में डलवा सकेंगे, ये कहना मुश्किल लगता है। साल 2023 में पूरी बाजी पलटने वाले पार्षद गौरव गुप्ता गुड्डू भी विद्रोही पार्षदों के पक्ष में मतदान करेंगे ये बात भी अभी पूरे विश्वास के साथ विद्रोही पार्षद नहीं कह सकते हैं।
पर्दे के पीछे जो लोग राजनीति खेल रहे थे वे सही रणनीति नहीं बना सके, यही वजह है कि विद्रोही पार्षद अपनी विजय की ताल ठोंकते ठोंकते 19 जनवरी की दोपहर को अपनी हार देखने को मजबूर हो सकते हैं। बेहतर होता कि ये पार्षद वार्डबंदी को लेकर सरकार को घेरते उसमें कानूनी लड़ाई में जीतने की संभावना ज्यादा बनी हुई थीं, अदालत का फैसला अगर उनके पक्ष में हो जाता तो वे निगम चुनाव से पहले ही सत्ता पक्ष को नैतिक आधार पर पराजय महसूस करा सकते हैं, इसका लाभ उन्हें निगम के चुनाव में भी मिलता, लेकिन अब बाजी हाथ से निकल चुकी है। फैसले में कुछ घंटे बाकी हैं।
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