
शुरुआती जटिलताओं के लिए व्यापारी जिम्मेदार नहीं
द बीट्स न्यूज
आगरा। आगरा मंडल व्यापार संगठन ने मांग की है कि साल 2016 से लेकर वित्तीय वर्ष 18 -19 तक के असेसमेंट को जिस स्वरुप में दाखिल किए गए हैं उसी रूप में स्वीकार किए जाएं, यही व्यापारियों के साथ न्याय संगत होगा।
संगठन कार्यालय पर हुई बैठक में व्यापारियों ने कहा है कि जिस समय जीएसटी लागू किया गया था उसके प्रावधानों को ना तो व्यापारी ठीक से समझ पा रहे थे, न ही अधिवक्ता। खुद विभाग के अधिकारी भी तमाम तथ्यों को लेकर भ्रम की स्थिति में थे ऐसे में उस समय अगर कुछ गलतियां हुई भी हैं तो उसके लिए व्यापारी जिम्मेदार नहीं है कानून में ही इतनी जटिलता थी। यही वजह है कि इस दौरान कम से कम 700 प्रावधानों को बदला गया। जिन प्रावधानों को खुद विभाग के लोग नहीं समझ पा रहे थे अगर उस कार्यकाल में कोई गलतियां व्यापारियों से हुई भी है तो इसके लिए जिम्मेदार व्यापारी नहीं है। ऐसे में 2016 से वित्तीय साल 18 19 तक के जो नोटिस जारी किए जा रहे हैं उनको तत्काल वापस लिया जाए।
संगठन कार्यालय पर एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद
संगठन के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री तथा एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1, आगरा को संबोधित पत्र भेजकर वर्ष 2016-17, 2017-18 एवं 2018-19 के लंबित असेसमेंटों का शीघ्र और न्यायसंगत निस्तारण करने की मांग की है।
संगठन ने पत्र में उल्लेख किया कि जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती दौर में न तो एचएसएन कोड, अलग-अलग टैक्स स्लैब, माल के वर्गीकरण, रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया और वैट से जीएसटी में ट्रांजिशन (ट्रांस-1) जैसी कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं। इसके साथ ही शुरुआती 5–6 महीनों तक जीएसटी पोर्टल भी सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाया, जिससे व्यापारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
संगठन का कहना है कि जीएसटी कानून इतना जटिल था कि स्वयं जीएसटी काउंसिल, जिसमें कई राज्यों के मुख्यमंत्री एवं सदस्य शामिल थे, भी इसकी प्रक्रिया को पूरी तरह नहीं समझ पा रहे थे। यही कारण है कि अब तक जीएसटी कानून में लगभग 700 से अधिक संशोधन किए जा चुके हैं।
व्यापार संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा इन वर्षों के लिए जारी किए गए बड़े-बड़े नोटिस, जिनमें यह कहा गया है कि व्यापारियों ने कानून के अनुसार रिटर्न या व्यापार नहीं किया, पूरी तरह से न्यायसंगत नहीं हैं। संगठन की मांग है कि जिन विवरणों को व्यापारियों ने उस समय अंतिम रूप से दाखिल किया था, उन्हें ही सही मानते हुए फाइनल असेसमेंट किया जाए।
पत्र में यह चिंता भी जताई गई कि इन वर्षों की असंख्य फाइलें विभाग में लंबित पड़ी हैं, जिससे सरकार को कोई वास्तविक राजस्व लाभ नहीं हो रहा है। अधिकांश मामलों में केवल अपीलें दाखिल हो रही हैं, टैक्स निर्धारण नहीं हो पा रहा, जिससे न तो व्यापारियों को राहत मिल रही है और न ही शासन को। इससे केवल कानूनी खर्च और प्रशासनिक बोझ बढ़ रहा है।
आगरा मंडल व्यापार संगठन ने सरकार से मांग की है कि इन पुराने वर्षों की समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष स्कीम लाई जाए, जिससे लंबित मामलों का त्वरित और सरल निस्तारण हो सके और व्यापारियों को अनावश्यक उत्पीड़न से राहत मिले।
इस मांग को उठाने वालों में संगठन के पदाधिकारियों चरणजीत थापर, पवन बंसल, गिरीश चंद्र गोयल, त्रिलोकचंद शर्मा, राजेश गोयल, अरविंद बंसल, प्रदीप लूथरा, राजकुमार अग्रवाल, नीतू अग्रवाल, सरिता गौतम, रिंकू अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, डी.के. जैन, सत्येंद्र अग्रवाल, अशोक गोयल, नितिन अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल रहे।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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