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Tuesday, Jun 16, 2026
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पंजाब की राजनीति में अकाली दल वारिस की एंट्री, नितिन के नेतृत्व में भाजपा का नवीन उदय संभव

आने वाले दो महीने में पंजाब की राजनीति का पूरा परिदृष्य ही बदलने की तैयारी शुरु

सत्येन ओझा,द बीट्स न्यूज.
चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में अकाली दल वारिस पंजाब दे की एंट्री व भाजपा की पंजाब में धमाकेदार पारी की तैयारी पंजाब की राजनीति में एक नया भूचाल ला सकती हैं, जो लोग पंजाब की वर्तमान राजनीति पर टीका टिप्पणी या विश्वेषण कर रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि आने वाले दो महीने पंजाब की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण हैं, दो महीने के बाद राजनीति का जो स्वरूप पंजाब में देखने को मिलेगा वह कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका देगा।
अकाली दल वारिस पंजाब दे ने अपना पहला प्रत्याशी मोगा में स.रछपाल सिंह सोसन के रूप में घोषित कर दिया है, उन्होंने मोगा विधानसभा क्षेत्र के शहर व ग्रामीण क्षेत्र में डोर टू डोर कैंपेन भी शुरू कर दी है, हालांकि ये बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात ये है कि उन्हें ग्रामीण क्षेत्र में ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्र में भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जैसे ग्रामीण किसी का इंतजार कर रहे थे, वो इंतजार उनका पूरा हो गया है।
इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का 20 व 21 जून को लुधियाना में संभावित कार्यक्रम पंजाब भाजपा के लिए विशेष होने वाला है, पार्टी के जो कार्यकर्ता एक दूसरे की टांग खींचकर अपने वर्चस्व की लड़ाई में भाजपा संगठन का नुकसान पहुंचा रहे हैं, ऐसे नेता अभी भी नहीं सुधरे तो भाजपा में वे अतीत बनकर रह जाएंगे, क्योंकि नये अध्यक्ष नितिन नवीन आक्रामक शैली वाले नेता हैं, वे सिर्फ समर्पित व पार्टी के अनुशासन में रहने वाले कार्यकर्ता को साथ लेकर चलना चाहते हैं, इसका संकेत उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही दे दिया था। पार्टी के फैसले को मानने वाले कार्यकर्ता ही अब भाजपा में नई भूमिका में होंगे। निजी वर्चस्व की लड़ाई लड़ने वाले नेता पार्टी की इस रेस से कहीं पीछे दिखाई देंगे।
सूत्रों की मानें तो चुनाव से पहले पार्टी की ये रणनीति भाजपा को नई ऊर्जा दे सकती है, पार्टी के जो लोग ये सवाल उठाते हैं कि भाजपा का कांग्रेसीकरण हो रहा है,तो उन्हें ये सोचना होगा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में भाजपा को क्या दिया? अगर सच में वे निजी लड़ाई से परे उठकर भाजपा को ईमानदारी से सींचते तो पंजाब में भाजपा को बुरे दिन नहीं देखने पड़ते, पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाने से पहले उन्हें अपने गिरेबान में झांकना होगा। जो सवाल वे भाजपा नेतृत्व पर उठाते हैं, वही सवाल उन पर भी उठते हैं।
जहां तक अकाली दल बादल का सवाल है तो ये ये पार्टी आज अपने सबसे बुरे दिन देख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल की राजनीति के अंतिम दिनों में जो कहा जाता था कि बड़े बादल के बाद पार्टी पटरी से उतर जाएगी, आज वही हाल हो रहा है। पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी का जहां तक सवाल है, पंजाब ने जितनी तेजी के साथ उसे स्वीकार किया था, उससे ज्यादा तेजी के साथ वह पंजाब की नजरों से उतर चुकी है, भले ही पार्टी प्रमुख केजरीवाल ये दावा करें कि भगवंत मान ने पंजाब को काले दिन से बाहर निकाला है, सच कुछ और ही है, ये पंजाब के लोग समझ चुके हैं, अब वे छलावे में आने वाले नहीं है।
कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व आपसी गुटबाजी में इस कदर जूझ रहा है कि वहां नेतृत्व का ही संकट पैदा हो गया है। कांग्रेस ने पंजाब के लिए इन दिनों में कोई ऐसा काम नहीं किया है, जिससे ये कहा जा सके कि वह पंजाब के दिल में फिर से अपनी जगह बना लेगा। बहरहाल अभी बहुत कुछ भविष्य पर निर्भर है लेकिन ये तय है कि आने वाले दो महीने पंजाब की राजनीति में बड़े बदलाव के होंगे जो आज के राजनीतिक समीक्षकों के गणित को पूरी तरह बदल देंगे।

द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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