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पुस्तक ‘दशमेश पिता बख्शिश पवित्र गंगा सागर सुच्ची सेवा संभाल’ का विमोचन


‘गंगासागर सिर्फ धार्मिक धरोहर नहीं, मानवता, सौहार्द व प्रेम का है प्रतीक’
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने राय कल्ला जी की निस्वार्थ सेवा व समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें भेंट की थी

सत्येन ओझा,द बीट्स न्यूज
सरे (कनाडा) पुस्तक ‘दशमेश पिता बख्शिश पवित्र गंगा सागर सुच्ची सेवा संभाल’ का विमोचन
पाकिस्तान के पूर्व सांसद राय अजीज उल्ला खान ने किया. ये पुस्तक उन्होंने विमोचन के बाद पुस्तक मोगा के समाजसेवी एवं कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन दविंदर पाल सिंह रिंपी को सौंपी।
ये आयोजन एक भव्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक समारोह के दौरान हुआ। पुस्तक डॉ. गुरदेव सिंह सिद्धू ने लिखी है। इस अवसर पर कनाडा की कई प्रमुख हस्तियां, समाजसेवी एवं राय अजीज उल्ला खान के परिवार के सदस्यों ने भाग लिया।
समारोह का आयोजन प्रसिद्ध उद्योगपति हरदेव सिंह ग्रेवाल ने किया। कार्यक्रम में कैम्ब्रिया कॉलेज के डायरेक्टर जेडी कौड़ा, वरुण कौड़ा, प्रोफेसर रणजीत सिंह पन्नू, मैडम पन्नू, सुखी बाठ, सरदार नछत्तर सिंह कूनर, हैरी कूनर (एडवाइजर टू मेयर, सरे), डॉ. डब्ल्यू. राजिंदर सिंह कंबो, कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल मोगा एवं देश भगत कॉलेज मोगा के डायरेक्टर दविंदर पाल सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
पुस्तक में उस पवित्र गंगा सागर के इतिहास और सेवा-संरक्षण का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है, जिसे दसवें सिख गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने रायकोट में अपने प्रवास के दौरान राय कल्ला जी की निस्वार्थ सेवा और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें भेंट किया था। यह अमूल्य धरोहर आज भी राय परिवार की नौवीं पीढ़ी द्वारा श्रद्धा और सम्मान के साथ सुरक्षित रखी जा रही है।
समारोह के दौरान पाकिस्तान के पूर्व सांसद एवं गंगा सागर के वर्तमान संरक्षक राय अजीज उल्ला खान ने बताया कि मुगल बादशाह औरंगजेब के अत्याचारों के दौर में जब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके परिवार के विरुद्ध षड्यंत्र रचे जा रहे थे और कई लोग भयवश उनका साथ देने से हिचकिचा रहे थे, तब रायकोट रियासत के मुस्लिम राजपूत शासक राय कल्ला जी ने अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर गुरु साहिब का स्वागत किया तथा पूरी श्रद्धा से उनकी सेवा की।
उन्होंने बताया कि रायकोट से प्रस्थान करते समय गुरु गोबिंद सिंह जी ने राय कल्ला जी की निष्ठा, साहस और अतिथि सत्कार से प्रसन्न होकर उन्हें गंगा सागर, एक रेहल और एक कृपाण भेंट की थी। समय के साथ रेहल नष्ट हो गई और कृपाण अंग्रेज शासकों के कब्जे में चली गई, लेकिन गंगा सागर को राय परिवार ने लगभग साढ़े तीन सौ वर्षों से सुरक्षित रखा हुआ है।
राय अजीज उल्ला खान ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी की इस पवित्र निशानी का सेवक होना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि गंगा सागर केवल एक धार्मिक धरोहर नहीं, बल्कि मानवता, प्रेम, भाईचारे और विभिन्न धर्मों के बीच आपसी सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अब उनके पुत्र राय मोहम्मद अली खान भी इस पवित्र विरासत की सेवा और संरक्षण में सहयोग कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान राय अजीज उल्ला खान ने यह पुस्तक विशेष रूप से दविंदर पाल सिंह को भेंट की। उपस्थित लोगों ने इस पुस्तक को इतिहास, विरासत और सांप्रदायिक सद्भाव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी और राय कल्ला जी के बीच सम्मान, विश्वास और मानवता का यह संबंध आज भी समाज को एकता, भाईचारे और धार्मिक सौहार्द का संदेश देता है।

द बीट्स न्यूज नेटवर्क
7087570105

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