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शाबाश हरमन……

-डॉ.हरजोत कमल ने रखा था, आवास की तरफ जाने वाले मार्ग का नाम हरमनप्रीत कौर रोड

मुझे याद है ये शायद 2004 या 05 की बात रही होगी, जब हरमनप्रीत कौर पंजाब क्रिकेट टीम के लिए चयनित हुई थीं, मैं तब हरमन का इंटरव्यू लेने उनके निवास पर पहुंचा था, उस समय हरमन गुरुनानक कालेज के सामने ही रहती थीं।
मोगा के गुरुनानक कॉलेज के खेल मैदान में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलते हुए जिन लोगों ने हरमन देखा था, हरमन के क्रिकेट कौशल को देख उन्हें इतना तो विश्वास हो गया था कि एक दिन ये लड़की कुछ कर दिखायेगी। लेकिन तब शायद ही किसी ने सोचा होगा बहुत ही सीधी साधी सी दिखने वाली ये लड़की एक दिन भारत को महिला क्रिकेट में विश्व विजेता बना देगी। हालांकि पहली बार इंटरव्यू में जिस तरह से हरमन ने अपना आत्मविश्वास दिखाया था, तब मैंने हरमन के पिता को कहा था कि उनकी बेटी जरूर एक दिन भारत के लिए खेलेगी, मेरे उस इंटरव्यू का हेडिंग भी संयोग से यही था.मैं भारत के लिए खेलना चाहती हूं, उस हेड लाइन को याद करता हूं तो सोचता हूं कि शायद हरमन के प्रति मेरा आंकलन उसके आत्मविश्वास के आगे कम था। हरमन ने उस इंटरव्यू की हेड लाइन को पीछे छोड़ते हुए भारत को विश्व विजेता बनाकर एक बड़ी व अमिट लकीर खींच दी। वह भी 36 साल की उम्र में। ये किसी भी खिलाड़ी के लिए छोटी बात नहीं है। हरमन में क्रिकेट के प्रति दीवानगी किस हद तक थी,ये इस बात से ही साबित हो जाता है कि शादी के तमाम ऑफर मिलने के बावजूद हरमन हमेशा यही कहती रहीं कि फिलहाल उन्हें सिर्फ क्रिकेट के साथ ही रहना है। हरमन के इसी जुनून ने आज मोगा को ही नहीं पूरे भारत को गौरवान्वित किया है। हरमन कभी पुरस्कार या सम्मान के पीछे नहीं भागी। मुझे याद है साल 2008 में मोगा में फिल्म अभिनेता सोनू सूद की मां प्रो.सरोज सूद की स्मृति में एक बड़ा आयोजन किया था, इस आयोजन का सूत्रधार मैं खुद था, इस कार्यक्रम में उस समय मोगा के तीन स्टार फिल्म अभिनेता सोनू सूद, उस समय पंजाब के डीजीपी स.परमदीप सिंह गिल व हरमनप्रीत कौर को सम्मानित किया जाना था। फिल्म अभिनेता सोनू सूद व तत्कालीन डीजीपी पीएस गिल दोनों ही पहुंचे थे, लेकिन हरमनप्रीत कौर उस समय भारतीय क्रिकेट टीम के कैंप में थीं, वे इस प्रतिष्ठित समारोह में छुट्टी लेकर आ सकती थीं, लेकिन उन्होंने कैंप नहीं छोड़ा, सम्मान उनके पिता हरमंदर सिंह भुल्लर ने लिया था।
हरमनप्रीत कौर को अपने समय में मोगा में कोई साथी महिला क्रिकेट खिलाड़ी तो नहीं मिली भारतीय क्रिकेट बोर्ड की मान्यता प्राप्त पिच भी मोगा में नहीं थी। जिस कारण उन्हें मोगा को छोड़कर जालंधर के हंसराज कालेज में एडमीशन लेना पड़ा था, वहां से हरमन ने क्रिकेट में जो रफ्तार पकड़ी वह आज पूरी दुनिया के सामने है। साल 2009 में उन्होंने एक दिवसीय मैच से अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था, पहला एक दिवसीय मैच उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए शानदार गेंदबाजी की थी। स्वाभाविक है, आज एक कप्तान के रूप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को विश्व विजेता बनाने से जितना सीना मोगा का चौड़ा हुआ है, हंसराज कालेज स्टाफ व स्पोर्ट्स स्टूडेंट के लिए भी ये गौरव के पल होंगे। क्रिकेट के कारण भले ही अब हरमनप्रीत कौर का मोगा आना बहुत ही कम हो चुका है, उनकी कोठी आज भी दुन्नेके में फिरोजपुर रोड पर है, भाजपा के जिलाध्यक्ष डॉ.हरजोत कमल सिंह जिस समय मोगा के विधायक थे, उन्होंने हरमनप्रीत कौर की कोठी को जाने वाली सड़क को भी हरमनप्रीत कौर रोड नाम देकर मोगा की इस बेटी को सम्मान दिया था। स्वाभाविक है कि कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जो कारनामा 2 नवंबर की रात को कर दिखाया उसके बाद मोगा का नाम सिर्फ क्रांतिकारी लाला लाजपत राय की जन्मस्थली, पदमश्री डॉ.मथुरादास पाहवा की कर्मस्थली, फिल्म अभिनेता सोनू सूद, दुनिया को आप्टीकल फाइबर केबल देकर ‘दुनिया मुट्ठी में’ इस सपने को साकार करने वाले मोगा के नरिंदर कपलानी जैसी महान सख्शियतों के साथ लिया जाएगा।-

-सत्येन ओझा

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