


नगर निगम चुनाव में “सबको साथ” लेकर चलने वाले नेता के रूप में बनी अलग पहचान
कांग्रेस को दोबारा मजबूती देनी है तो संगठन को जोड़ने वाले नेतृत्व को आगे आना होगा
सत्येन ओझा, द बीट्स न्यूज
मोगा। नगर निगम मोगा चुनाव के दौरान कांग्रेस जहां दो अलग-अलग गुटों में बंटी दिखाई दी, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं इंप्रूवमेंट ट्रस्ट मोगा के पूर्व अध्यक्ष विनोद बंसल एक ऐसे नेता के रूप में उभरकर सामने आए, जिन्होंने व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर उठकर पूरे कांग्रेस संगठन को साथ लेकर चलने का प्रयास किया।
दूसरी ओर चुनावी माहौल के दौरान कांग्रेस के भीतर एक गुट ऐसा नजर आया जो व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, शक्ति प्रदर्शन और अपने प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाने में पूरी ताकत लगाता दिखाई दिया। कई नेता केवल अपने समर्थित उम्मीदवारों तक सीमित रहे और राजनीतिक समीकरण साधने में व्यस्त नजर आए। चिंता की बात ये है कि जिलाध्यक्ष हरीसिंह खाई भी इसी गुट के साथ खड़े दिखायी दिये। हालांकि वे पार्टी की एकजुटता वाले गुट के साथ चित्रों में तो दिखाई दिये, लेकिन पार्टी के फैसलों में वे पार्टी में निजी स्तर पर अपनी ताकत बढ़ाने में लगे गुट के साथ खड़े दिखाई दिये। भविष्य में ये कदम पार्टी के लिए घाटक साबित हो सकता है। ये कदम पार्टी के लोकतंत्र को खत्म कर पार्टी को कमजोर बना सकता है।
दूसरी ओर विपरीत विनोद बंसल लगातार ऐसे नेता के रूप में सामने आए, जिन्होंने गुटबाजी से दूरी बनाए रखते हुए कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों और वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने की कोशिश की। चुनाव प्रचार से लेकर मतदान वाले दिन तक विनोद बंसल अलग-अलग वार्डों में कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय दिखाई दिए। उन्होंने केवल अपने करीबी नेताओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कांग्रेस चुनाव चिन्ह “पंजा” लेकर मैदान में उतरे लगभग सभी उम्मीदवारों का मनोबल बढ़ाया। राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा भी रही कि जहां कई बड़े चेहरे दिन के समय मैदान से गायब रहे, वहीं विनोद बंसल लगातार बूथों और वार्डों में कार्यकर्ताओं के बीच मौजूद रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मोगा जिले में कांग्रेस को फिर से मजबूती के साथ खड़ा होना है तो पार्टी को ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो संगठन को जोड़ने का काम करें, न कि उसे गुटों में बांटने का। क्योंकि कांग्रेस संगठन मजबूत होगा तभी पार्टी का कोई नेता भी मजबूत हो सकेगा। नगर निगम चुनाव के दौरान विनोद बंसल की कार्यशैली इसी सोच को दर्शाती नजर आई।
वार्ड नंबर 2 में कांग्रेस उम्मीदवार जसप्रीत सिंह विक्की के समर्थन में खुलकर खड़े होना हो या वार्ड नंबर 41 में कांग्रेस उम्मीदवार कुनाल शर्मा और कार्यकर्ताओं के साथ कथित धक्केशाही के विरोध में आवाज उठानी हो, विनोद बंसल हर मोर्चे पर सक्रिय दिखाई दिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन की कथित कार्रवाई का विरोध करते हुए लोकतंत्र की रक्षा की बात कही और कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़े रहे।
कांग्रेस सूत्रों की मानें तो विनोद बंसल की इस कार्यशैली और संगठनात्मक सोच को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी गंभीरता से नोटिस किया है। स्थानीय स्तर पर भले ही कुछ विरोधी गुट उनकी बढ़ती लोकप्रियता को लेकर उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन इसके बावजूद केंद्रीय नेतृत्व के सामने मोगा जिले में उनकी छवि एक संभावनाशील और भविष्य के नेतृत्व के रूप में उभरकर सामने आई है।
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में कांग्रेस यदि पंजाब और खासतौर पर मोगा जिले में खुद को फिर से मजबूत करना चाहती है, तो उसे ऐसे नेताओं को आगे लाना होगा जो संगठन को जोड़ने, कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर उठकर पार्टी हित में काम करने की क्षमता रखते हों। नगर निगम चुनाव के दौरान विनोद बंसल की सक्रियता और उनकी “सबको साथ लेकर चलने” वाली राजनीति ने उन्हें कांग्रेस के भीतर एक अलग पहचान दिलाई है।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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