भारत में बने रेल कोच अब बांग्लादेश की पटरियों पर दौड़ेंगे

बांग्लादेश को 18 एलएचबी कोच का निर्यात, फिरोजपुर मंडल को ₹91.73 लाख का राजस्व मिला

हुसैनपुर से दर्शना रेलवे स्टेशन के लिए पहली रेक रवाना, ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी वैश्विक पहचान
सत्येन ओझा.( द बीट्स न्यूज)
फिरोजपुर। भारतीय रेलवे के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में फिरोजपुर मंडल ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार के मार्गदर्शन में बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट के प्रयासों से 18 एलएचबी रेल कोचों की पहली रेक 11 अक्टूबर को हुसैनपुर रेलवे स्टेशन से बांग्लादेश के दर्शना रेलवे स्टेशन के लिए रवाना की गई। इस निर्यात से फिरोजपुर मंडल को ₹91.73 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है।
कपूरथला में हुआ निर्माण
रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला में निर्मित इन 18 एलएचबी कोचों को बांग्लादेश रेलवे की परिचालन संबंधी आवश्यकताओं और यात्री सेवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस उपलब्धि से न केवल भारतीय रेल की निर्यात क्षमता को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि देश में निर्मित रेल कोचों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपयोगिता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।
व्यवसायिक अवसरों के खुलेंगे नये रास्ते
यह निर्यात फिरोजपुर मंडल, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला, राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस) लिमिटेड और बांग्लादेश रेलवे के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है। ‘मेक इन इंडिया, फॉर द वर्ल्ड’ की भावना के अनुरूप यह पहल भारतीय रेलवे के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और व्यावसायिक अवसरों के नए रास्ते खोलने की क्षमता रखती है।
किसे और क्या होगा फायदा?
फिरोजपुर मंडल को राजस्व लाभ: 18 कोचों के निर्यात से मंडल को ₹91.73 लाख की आय हुई है। इस तरह की व्यावसायिक पहलें रेलवे की गैर-पारंपरिक आय के अवसरों को बढ़ाने और माल ढुलाई एवं अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विकास में सहायक हो सकती हैं।
रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला को अंतरराष्ट्रीय पहचान
स्वदेशी तकनीक से निर्मित एलएचबी कोचों का विदेश में उपयोग भारतीय विनिर्माण क्षमता को प्रदर्शित करेगा। इससे भविष्य में दूसरे देशों की रेल संबंधी जरूरतों के लिए भी भारतीय कोचों की मांग बढ़ने की संभावनाएं बन सकती हैं।
बांग्लादेश रेलवे को परिचालन में सहयोग: इन कोचों का इस्तेमाल बांग्लादेश रेलवे की जरूरतों के अनुसार यात्री सेवाओं में किया जा सकेगा। इससे उसे अपने रेल बेड़े की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यात्री सुविधाओं में वास्तविक सुधार कोचों की तैनाती, रखरखाव और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
भारतीय उद्योग और रोजगार को प्रोत्साहन: रेल कोचों के निर्यात के बढ़ते अवसरों से विनिर्माण, कलपुर्जों की आपूर्ति, तकनीकी सेवाओं और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों को लाभ मिल सकता है। इससे संबंधित उद्योगों में काम और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी बढ़ती है।
भारत-बांग्लादेश रेल सहयोग को मजबूती: रेल उपकरणों के निर्यात से दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहन मिल सकता है। साथ ही, भारतीय रेलवे को वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक/फ्रेट परमदीप सिंह सैनी ने बताया कि यह उपलब्धि फिरोजपुर मंडल की बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट के प्रयासों और विभिन्न संस्थानों के साथ बेहतर तालमेल का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल भारतीय रेलवे के राजस्व में वृद्धि करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय निर्यात को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारत में बने एलएचबी कोच  की विशेषता
भारत में निर्मित एलएचबी (लिंके हॉफमैन बुश) कोच पुराने आईसीएफ कोचों की तुलना में अधिक सुरक्षित, आधुनिक और आरामदायक हैं।
-ये कोच सामान्य तौर पर 160 किमी/घंटा से लेकर 200 किमी/घंटा तक की गति पर चलने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
-हल्का वजन : ये स्टेनलेस स्टील और फेरिटिक/ऑस्टेनिटिक स्टील से बने होते हैं, जिससे पुराने डिब्बों की तुलना में इनका वजन काफी कम होता है।
– एंटी-टेलीस्कोपिक डिज़ाइन : दुर्घटना की स्थिति में ये कोच एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान कम होता है।
– सेंटर बफर कपलर : इसमें पुराना स्क्रू कपलिंग सिस्टम नहीं होता; इसके बजाय सेंटर बफर कपलर लगा होता है जो झटके को कम करता है और डिब्बों को आपस में मजबूती से जोड़कर रखता है।
– बेहतर सस्पेंशन इसमें फयाद (FIAT) डिज़ाइन का सस्पेंशन सिस्टम होता है, जिससे यात्रियों को कम झटके लगते हैं और यात्रा आरामदायक होती है।
• अग्निरोधक सामग्री (Fire Retardant): कोच के अंदर ऐसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है जो आसानी से आग नहीं पकड़तीं।
• अधिक सीट क्षमता: ये पुराने कोचों की तुलना में लगभग 1.77 से 2 मीटर लंबे होते हैं, जिससे इनमें अतिरिक्त सीटें या बर्थ आ जाती हैं।
• डिस्क ब्रेक सिस्टम: उच्च गति पर भी सुरक्षित और प्रभावी ब्रेकिंग के लिए इसमें आधुनिक न्यूमैटिक डिस्क ब्रेक लगे होते हैं।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
7087570105

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *