एलाइड हेल्थकेयर कोर्स में दाखिले की अंतिम तिथि 15 नवंबर तक बढ़ी, विद्यार्थियों को राहत
फार्मेसी में प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने के बाद हेल्थकेयर क्षेत्र में करियर बनाने का मिलेगा अवसर, मेडिकल लैब से लेकर रेडियोलॉजी और डायलिसिस टेक्नोलॉजी तक कई विकल्प
द बीट्स न्यूज
मोगा.स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने देशभर में एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल कोर्सों में दाखिले की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 15 नवंबर 2026 कर दी है। इस फैसले से उन हजारों विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय मिलेगा, जो विभिन्न कारणों से पहले निर्धारित समय सीमा तक दाखिला नहीं ले पाए थे।
फेडरेशन ऑफ सेल्फ फाइनेंसिंग टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष एवं पंजाब अनएडेड कॉलेज एसोसिएशन (PUCA) के अध्यक्ष तथा राजपुरा स्थित आर्यन्स ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन डॉ. अंशु कटारिया और PUCA के महासचिव एवं मोगा स्थित आईएसएफ फार्मेसी कॉलेज के चेयरमैन प्रवीण गर्ग ने इस फैसले का स्वागत करते हुए नेशनल कमीशन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि दाखिले की समय सीमा बढ़ाना विद्यार्थियों के हित में सराहनीय कदम है। इससे उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के तेजी से बढ़ते क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने का एक और अवसर मिलेगा।
क्या होते हैं एलाइड हेल्थकेयर कोर्स, किन क्षेत्रों में मिलता है काम?
एलाइड हेल्थकेयर कोर्स ऐसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मिलकर मरीजों के उपचार, जांच, निदान और पुनर्वास में सहयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तकनीकी रूप से दक्ष और प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करना है।
ये हैं पाठ्यक्रम
मेडिकल लैबोरेटरी साइंस: खून, पेशाब और अन्य मेडिकल सैंपल की जांच तथा बीमारी की पहचान में सहयोग।
मेडिकल रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग टेक्नोलॉजी: एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों से संबंधित तकनीकी कार्य।
ऑपरेशन थिएटर एवं एनेस्थीसिया टेक्नोलॉजी: ऑपरेशन के दौरान चिकित्सा टीम को तकनीकी सहयोग और उपकरणों की व्यवस्था।
डायलिसिस टेक्नोलॉजी: किडनी के मरीजों के डायलिसिस उपचार में विशेषज्ञों की सहायता।
फिजियोथेरेपी: चोट, बीमारी या सर्जरी के बाद मरीजों की शारीरिक क्षमता और गतिशीलता बहाल करने में सहयोग।
ऑप्टोमेट्री: आंखों की दृष्टि की जांच और दृष्टि संबंधी समस्याओं के मूल्यांकन में सहयोग।
इमरजेंसी एवं ट्रॉमा केयर टेक्नोलॉजी: दुर्घटना और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग।
रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी: सांस संबंधी बीमारियों के उपचार और श्वसन उपकरणों के संचालन में सहायता।
न्यूट्रिशन एवं डायटेटिक्स: मरीजों की बीमारी और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पोषण संबंधी मार्गदर्शन।
ऑक्यूपेशनल थेरेपी: बीमारी या चोट के बाद मरीजों को दैनिक गतिविधियां दोबारा करने में सक्षम बनाना।
इन पाठ्यक्रमों की पढ़ाई और निर्धारित क्लीनिकल प्रशिक्षण पूरा करने के बाद योग्यतानुसार अस्पतालों, डायग्नोस्टिक लैब, मेडिकल कॉलेजों, ट्रॉमा सेंटरों, डायलिसिस सेंटरों, पुनर्वास केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, प्रत्येक कोर्स की पात्रता, अवधि और कार्यक्षेत्र अलग-अलग होता है।
फार्मेसी में दाखिला न ले पाने वालों के लिए अवसर बाकी हैं
फार्मेसी और एलाइड हेल्थकेयर दोनों स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्र हैं, लेकिन इनके पाठ्यक्रम और कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं। फार्मेसी के अंतर्गत डी.फार्मेसी, बी.फार्मेसी और एम.फार्मेसी जैसे पाठ्यक्रम आते हैं, जिनमें दवाओं के निर्माण, गुणवत्ता, वितरण, उपयोग और फार्मास्यूटिकल सेवाओं से संबंधित शिक्षा दी जाती है।
वहीं एलाइड हेल्थकेयर के अंतर्गत मेडिकल लैब, रेडियोलॉजी, डायलिसिस, ऑपरेशन थिएटर और अन्य चिकित्सा तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रम आते हैं। फार्मेसी की दाखिला प्रक्रिया अपने अलग शैक्षणिक और प्रवेश कार्यक्रम के तहत संचालित होती है। मौजूदा शैक्षणिक सत्र में इसकी निर्धारित प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के कारण नए दाखिलों के अवसर सीमित हो चुके हैं। ऐसे में एलाइड हेल्थकेयर कोर्स उन विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आए हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
नर्सिंग कोर्सों की तारीख भी बढ़ी
डॉ. कटारिया और प्रवीण गर्ग ने बताया कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने भी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नर्सिंग कार्यक्रमों में दाखिले की अंतिम तिथि 15 नवंबर तक बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग, फार्मेसी और एलाइड हेल्थकेयर तीनों ही स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं, लेकिन इनके लिए अलग-अलग नियामक संस्थाएं और प्रवेश नियम लागू होते हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टरों के साथ प्रशिक्षित तकनीकी और सहायक चिकित्सा पेशेवरों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में उपलब्ध पाठ्यक्रमों की जानकारी हासिल कर अपनी रुचि और शैक्षणिक योग्यता के अनुसार सही विकल्प चुनना चाहिए।
-द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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