
गुरप्रीत सचदेवा फिर बने मोगा की आवाज, निगम की 2.13 करोड़ रुपये की राशि डूबने से बचाई
-एफएंडसीसी की बैठक में निगम कमिश्नर ने नियमों का हवाला दिया तो हाउस में प्रस्ताव पास कराने की कोशिश की
-स्ट्रीट लाइट का पूरे शहर में हाल बेहाल, फिर भी ठेकेदार पर मेहरबानी आखिरकार किसलिए, पूछेगी जनता
सत्येन ओझा.द बीट्स न्यूज
मोगा। पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा एक बार फिर मोगा की आवाज बने, नगर निगम हाउस की बैठक में जब मोगा में एलईडी लाइट लगा रही कंपनी पर लगे जुर्माने की कई करोड़ रुपये की पैनल्टी का भुगतान करने की तैयारी हो चुकी थी, उस समय पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा ने आवाज बुलंद की, जिन तथ्यों का हवाला देते हुए पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा ने अपनी बात हाउस के पटल पर रखी, देखते ही देखते बाकी पार्षद भी उनके पक्ष में खड़े हो गये। आखिरकार एग्रीमेंट के खिलाफ एलईडी लाइट लगाने वाली बिजली कंपनी की पैनल्टी माफ करने वाले कई करोड़ रुपये के भुगतान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।
पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा ने ये आवाज बुलंद कर ये साबित कर दिया कि पार्षद अपनी सही बात हाउस में रखने की की हिम्मत रखें तो उनकी आवाज सुनी जाती है। गुरप्रीत सिंह सचदेवा वही पार्षद हैं जिन्होंने मोगा के मेन बाजार की खस्ताहाल सड़क की मरम्मत के लिए उस समय आवाज उठाई थी, जब कई हादसों के बावजूद मेन बाजार की खस्ताहाल सड़क की कोई सुनवाई नहीं हो रही थी, तब पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा अकेले दम पर मोगा की आवाज बने थे, और मेन बाजार में बूट पालिश कर उससे मिली राशि निगम अधिकारियों को देने पहुंच गये थे, उस समय पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा के साथ मेन बाजार के सभी दुकानदार साथ आ गए थे।पार्षद के इस आक्रामक रवैये के बाद आखिरकार हल निकला, मेन बाजार की सड़क की रिपेयर हुई थी।
क्या है मामला
नगर निगम चुनावों से ऐन मौके पर निगम हाउस की अंतिम बैठक में अचानक हाउस की एक प्रस्ताव लाया गया कि मोगा में एलईडी की लाइटें लगाने वाली कंपनी पर लगाई गई पैनल्टी की राशि माफ कर कंपनी को भुगतान कर दिया जाय। पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि
जब एग्रीमेंट में पेनल्टी का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। कंपनी की लापरवाही के कारण शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित हो रही, कई इलाके अंधेरे में डूबे हैं। ऐसे में फिर कंपनी को राहत देने की कोशिश क्यों की जा रही है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि निगम प्रशासन पर क्या का दबाव है।
स्ट्रीट लाइट कंपनी पर नवंबर 2023 से जनवरी 2026 तक करीब 2.13 करोड़ रुपये की पेनल्टी बनती है। इससे पहले भी लगभग 67 लाख रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक खराब लाइटों को 48 घंटे के भीतर ठीक करना जरूरी था, अन्यथा प्रति लाइट प्रतिदिन जुर्माना लगाने का प्रावधान है। बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि निगम की बिजली शाखा की रिपोर्ट और रिकॉर्ड के आधार पर ही कंपनी पर पेनल्टी लगाई गई थी। ऐसे में अब उसे वापस लेने या सेटलमेंट करने की कोशिश क्यों की जा रही है। कई पार्षदों ने साफ कहा कि सरकारी धन को निजी कंपनी के हित में छोड़ना शहर के साथ अन्याय होगा। हाउस में बढ़ते विरोध और तीखी बहस के बाद आखिरकार कंपनी को राहत देने संबंधी प्रस्ताव को रद्द करना पड़ा।
इससे पहले एफएंडसीसी की बैठक में कंपनी की पैनल्टी को माफ कर उसे वसूली गई राशि का भुगतान करने का प्रस्ताव लाया गया था, एफएंडसीसी की बैठक में निगम कमिश्नर आईएएल जसपिंदर सिंह को लगा कि कुछ गलत है तो उन्होंने लिखित में टिप्पणी दी कि ठेकेदार कंपनी के मामले में एग्रीमेंट के अनुसार कार्रवाई की जाय।एग्रीमेंट में लापरवाही पर पैनल्टी लगाने की बात स्पष्ट रूप से लिखी गयी है। जब लगा कि एफएंडसीसी में प्रस्ताव पर निगम कमिश्नर की लिखित टिप्पणी आने पर ठेकेदार को भुगतान नहीं किया जा सकता है तो प्रस्ताव हाउस में लाया गया, हाउस प्रस्ताव को पास करती तो भुगतान हो जाता।
लेकिन हाउस में पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा की दलीलों के बाद पूरा हाउस उनके पक्ष में खड़ा हो गया तो ये प्रस्ताव रद्द करना पड़ा।
अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार ऐसी क्या मजबूरी थी कि चुनाव से ऐन मौके पर ठेकेदार पर नगर निगम इस कदर मेहरबान हो गई कि उसे पैनल्टी माफ कर राशि के भुगतान के लिए निगम हाउस की विशेष बैठक बुलानी पड़ी। आखिरकार ये प्रस्ताव किसके कहने पर तैयार किया गया ये तमाम सवाल आने वाले निगम चुनाव में जनता पूछेगी।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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