-एक अकेले ड्राईवर ने दिन दहाड़े 43 बोरियां चोरी कर लोड कर लीं, एफसीआई या जीआरपी को पता ही नहीं लगा?
-लोडिंग दिन में होती है, लोडिंग के समय एफसीआई का प्रतिनिधि मौके पर मौजूद रहता है, एफआईआर में इसका जिक्र नहीं
-जिस दुकानदार ने चोरी का ट्रक पकड़वाला. उसका जिक्र नहीं, ड्राईवर का पता लगाने के बाद फोन दुकानदारों को क्यों हो रहे हैं?
सत्येन ओझा.द बीट्स न्यूज
मोगा में 8 मई को चोरी के चावल की 43 बोरियों से भरे ट्रक के पकड़े जाने का मामला भले ही दर्ज एफआईआर में सामान्य मामला बताने का प्रयास किया है, लेकिन दर्ज एफआईआर पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों की मानें तो ये चोरी का कोई सामान्य मामला नहीं बल्कि चावल व गेहूं चोरी का एक बड़ा स्कैंडल है।
ईमानदारी से जांच तो तीन विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
मोगा जीआरपी चौकी प्रभारी नरेश कुमारी शर्मा का कहना है कि थाना फरीदकोट जीआरपी के प्रभारी जसवीर सिंह मोगा प्लेटी ( माल गोदाम) की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली थी कि ट्रक नंबर पीबी 13 ए यू 9316 में अजीतवाल माल गोदाम से स्पेशल ट्रेन में लोडिंग के दौरान चुराये गईं चावल की 43 बोरियां उस ट्रक में हैं। इस सूचना के बाद जीआरपी को ट्रक मिल गया लेकिन चालक फरार हो गया।
एफआईआर पर उठे सवाल
स्पेशल रेलगाड़ी में चावल की लोडिंग दिन में अजितवाल रेलवे स्टेशन के माल गोदाम से स्पेशल गाड़ी में हुई। लोडिंग के समय एफसीआई का प्रतिनिधि मौजूद था। जो माल लड हो जाने के बाद एनओसी जारी करता है।
कंडे की तोल के अनुसार कुल लोड माल का ब्यौरा भी दर्ज करता है।
सवाल उठता है कि दिन दहाड़े क्या रेलगाड़ी में माल लोडिंग कराने पहुंचे ट्रक चालक ने अकेले ही 43 बोरियां चोरी कर लोड कर लीं। किसी को भनक क्यों नहीं लगी।
43 बोरियां लोड होने में समय भी लगा होगा।
जमीनी सच होश उड़ा सकते हैं
सूत्रों का कहना है कि अजितवाल से चावल व गेहूं की लोडिंग के दौरान चोरी करने वाला एक बड़ा स्कैंडल लंबे समय से अपनी साजिश को अंजाम दे रहा है। इस पूरे स्कैंड़ल में जीआरपी, एफसीआई व ट्रक आपरेटर शामिल बताये जा रहे हैं। अजितवाल में चोरी का चावल लगभग 12 दुकानों पर सस्ते दामों में बेचा जाता है, बाद में ये चावल राइस मिलों में भी पहुंचता था। चोरी का माल खरीदने वाले एक दुकानदार को माल कुछ समय से मिल नहीं रहा था, उसे पूरे स्कैंडल की जानकारी थी, इसी दुकानदार ने पूरे मामले का भंडाफोड़ ही नहीं किया, बल्कि ट्रक को भी अजितवाल से मटवानी के रास्ते में पकड़वा दिया। मटवानी से अजितवाल के बीच में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच करने पर पूरा स्कैंडल सामने आ जाएगा।
सूत्रों की मानें तो माल लोडिंग के समय मौके पर एफसीआई का कोई रेगूलर कर्मचारी था ही नहीं, एक प्राईवेट कारिंदा एफसीआई की ओर से रखा गया है वही माल लोडिंग के बाद एनओसी जारी करता है, उसके बाद रेल की बोगी को सील कर दिया जाता है। वह मौके पर था, फिर उसे चोरी का पता कैसे नहीं लगा? ये बड़ा सवाल है। सवाल उठता है कि चोरी की बोरियों से भरा ट्रक पकड़े जाने के बाद क्या रेलवे की स्पेशल गाड़ियों में लोड किये माल की जांच कराई गई, जितना माल पकड़ा गया है कि या उतना ही माल कम हुआ है या फिर माल लोड काफी कम किया गया था। सूत्रों की मानें तो जिस ट्रक से माल बरामद किया गया है वह ट्रक एफसीआई के ही एक गोदाम से माल लोडिंग कराने आया था, नियमानुसार माल लोड करने से पहले कुल माल का वजन होता है, ट्रक खाली होने पर दोबारा उसका वजन होता है, लेकिन जिस ट्रक से माल बरामद हुआ है उसका वजन कराया ही नहीं गया था। ये तथ्य भी एफआईआर में नहीं है। चोरी के माल के साथ बरामद
ट्रक ट्रक चालक का आखिर जीआरपी पता क्यों नहीं लगा पा रही है, या फिर पता लगाने की कोशिश हीनहीं हो रही है। कर्मचारियों व दुकानदारों की कॉल डिटेल खंगाली जाय तो आंखें खोल देने वाला बड़ा स्कैंडल सामने आ सकता है। क्योंकि अब फोन चोरी का माल खरीदने वाले दुकानदारों को किये जा रहे हैं।
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द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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