
-गौरव गर्ग बन सकते हैं सीनियर डिप्टी मेयर, ऐसा हुआ तो एक और कानूनी विवाद खड़ा होगा
-सूत्रों की मानें तो कांग्रेस, शिअद, भाजपा ने पहले ही सत्ता के आगे घुटने टेके, चुनाव प्रक्रिया से दूरी बनाई
सत्येन ओझा.द बीट्स न्यूज
मोगा। कानूनी विवादों के बीच नगर निगम मोगा के सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का चुनाव 6 जुलाई को प्रस्तावित है, चुनाव पूर्वाह्न 11.30 बजे से जिला प्रबंधकीय कॉम्पलेक्स में होगा। सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए कई दावेदार सामने आ रहे हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के पार्षद गौरव गर्ग का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है, अगर ऐसा होता है तो पहले से ही कानूनी विवादों में घिरे चुनाव में और एक नया विवाद जुड़ सकता है। मेयर का चुनाव पार्षद गौरव गर्ग की अध्यक्षता में हुआ था।
क्या है संवैधानिक प्रक्रिया
पंजाब में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव पंजाब नगर निगम अधिनियम 1976 के तहत एक ही बैठक में कराए जाते हैं। मेयर का चुनाव अलग से और सीनियर डिप्टी मेयर का चुनाव बाद में करने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। तीनों पदों का चुनाव एक साथ एक ही प्रक्रिया में होता है।ये चुनाव एक ही पार्षद की अध्यक्षता में होता है। आम आदमी पार्टी सूत्रों की ओर से जो चर्चाएं सामने आ रही हैं उसके अनुसार गौरव गर्ग को सीनियर डिप्टी मेयर बनाया जा सकता है, अगर ऐसा होता है तो चुनाव कराने वाले पीठासीन अधिकारी बदल जाएंगे, या तो मेयर विनय पाल कौर की अध्यक्षता में चुनाव होंगे या फिर कोई और अध्यक्षता करेगा, अगर ऐसा होता है तो ये संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ होगा।
पहले ही मोगा में मेयर के चुनाव में अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर सिविल सोसायटी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मेयर के चुनाव को चुनौती दी है, इस याचिका पर सुनवाई की अगली तिथि 16 जुलाई तय की है।
क्या है राजनीतिक गणित
50 वार्ड वाली नगर निगम में आम आदमी पार्टी के 30 पार्षद हैं, कांग्रेस पार्टी के 7, शिरोमणि अकाली दल के तीन, भाजपा के तीन व आजाद प्रत्याशियों की संख्या 7 है। सूत्रों की मानें तो सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस चुनाव ने पहले ही अपने आप को पीछे कर लिया है। कांग्रेस ही नहीं शिरोमणि अकाली दल व भाजपा ने चुनाव से दूरी बना ली है। सूत्रों की मानें तो
तीनों पार्टियों के पार्षद चुनाव बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। तीनों विपक्षी पार्टियां भले ही सीनियर डिप्टी मेयर
व डिप्टी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया में भले ही हिस्सा न लें, इससे आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी की जीत पर कोई असर नहीं होगा, दोनों ही पदों पर आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों की जीत तय है। लेकिन जिस प्रकार की रणनीति विपक्ष ने अपनायी है, इससे माना जा रहा है कि इन तीनों पार्टियों ने बैठक में हिस्सा लेकर कानूनी पक्ष के आधार पर विरोध करने के बजाय सत्ताधारी पार्टी के आगे पहले ही घुटने टेक दिये हैं, भले ही तीनों पार्टियों की हार तय है, लेकिन बैठक में हिस्सा लेकर अगर ये पार्टियां सत्ताधारी पार्टी का कानूनी आधार पर विरोध करतीं तो हार कर भी वे जनता का दिल जीत सकती थीं। तब जनता के बीच एक संदेश जाता कि
कम से कम विपक्षी पार्टियों ने सत्ताधारी पार्टी का विरोध करने की हिम्मत तो दिखायी।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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