




द बीट्स न्यूज
सुनाम। धर्म जागरण मंच पंजाब के प्रमुख रामगोपाल ने कहा कि देशवासी जिस दिन भगवान राम के जीवन के पांच सूत्र अपने जीवन में उतार लेंगे, तभी समृद्ध भारत बनेगा। रामगोपाल मंगलवार को सूरजकुण्ड सर्वहितकारी विद्या मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने जीवन में परिवार को सबसे ज्यादा महत्व दिया, जब भी दुनिया में आदर्श पति, आदर्श पत्नी, आदर्श भाई, पिता, मां की बात होती है तो के राम के परिवार का उदाहरण दिया जाता है। परिवार के सदस्य धार्मिक ग्रंथों को पढ़ें, उनका अनुसरण करें तभी ये संभव हो सकता है।
उन्होंने कहा कि समाज में जिनको छोटा समझा जाता है, समृद्ध लोग उन्हें अपने से दूर रखते हैं, जिससे भेदभाव का भाव पैदा होता है। भगवान राम ने वंचितों, शोषितों में नेतृत्व के गुण विकसित किए। उन्हें हमेशा अपने करीब रखा।चाहे वह निषाद राज केवट हों या माता शबरी किसी को नहीं लगा वह नीच है, छोटा है। समरसता का ये भाव समाज में पैदा करने की जरूरत है।
रामगोपाल ने कहा कि तीसरा स्वदेशी पर जोर देने की जरूरत है। जिस समय राम वन में थे, तब चाहे समुद्र पर पुल बनाने की बात हो या युद्ध की तैयारी। इसके लिए उसी सामान का प्रयोग किया जो जंगल में मौजूद था, जितना हम स्वदेशी की राह पर चलेंगे, देश उतना ही तरक्की की राह पर आगे बढ़ेगा।
चौथा पर्यावरण सुरक्षा। आज दूषित हो रहा पर्यावरण सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। मनुष्य बीमारियों का शिकार हो रहा है, जीवन संकट में है। भगवान राम 14 साल वन में रहे, सुग्रीव ने भगवान राम को महल में रहने का आग्रह किया, लेकिन राम ने उसे ठुकरा दिया। जंगल में ही रहे। रामायण में कितने ही प्रकार के मौसम, नदियों, आश्रम, गुरुकुल, विश्वविद्यालय का जिक्र आता है, यह सब उस समय जंगल में ही थे। विकास के नाम पर पर्यावरण को संकट में डालना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि अंतिम सूत्र कर्तव्य पालन है। कोई भी देश सड़क, बिजली, बिल्डिंग से नहीं वहां के नागरिकों से बनता है। देश तभी आगे बढ़ेगा जब उस देश का हर नागरिक अपने कर्तव्य का पालन करता हो। राम राज्य में धर्म का मतलब कर्तव्य पालन ही था। सब लोग अपना काम करते थे, इसीलिए कभी अकाल मृत्यु नहीं होती थी। कोई बीमार नहीं होता था।
विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए हम सब भगवान राम के इन्हीं पांच गुणों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेकर समृद्ध भारत के निर्माण में अपना सहयोग दें।
इन पांच गुणों की चर्चा परिवार में, गली मोहल्ले के मंदिरों में, अपने कार्यस्थल पर करें। यही प्रवृत्ति भारत को दुनिया का विकसित देश बनाने में मददगार साबित होगी।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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