♦आगरा मेट्रो ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए तेज किए प्रयास
एमजी रोड पर एंटी स्मॉग गन और पानी के टैंकर से हो रहा छिड़क
निर्माण स्थलों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए ग्रीन नेट से सामग्री ढकने के निर्देश, सड़क की मरम्मत भी जारी
द बीट्स न्यूज (विनोद गौतम)
आगरा। शहर में मेट्रो निर्माण कार्यों के दौरान धूल उत्सर्जन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) लगातार प्रयास कर रहा है। निर्माण कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए आगरा मेट्रो की ओर से एमजी रोड सहित शहर के विभिन्न हिस्सों में नियमित अंतराल पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। इसके लिए ट्रक पर लगाई गई एंटी स्मॉग गन और पानी के टैंकरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मेट्रो निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल आसपास के वातावरण, सड़क से गुजरने वाले वाहनों और स्थानीय नागरिकों को प्रभावित कर सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए यूपीएमआरसी की ओर से धूल नियंत्रण के लिए कई उपाय अपनाए जा रहे हैं। निर्माण स्थलों पर बैरिकेडिंग करने के साथ निर्माण सामग्री को ग्रीन नेट से ढककर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हवा के साथ धूल फैलने की आशंका को कम किया जा सके।
धूल के कणों पर नियंत्रण से मिलेगी राहत
निर्माण स्थलों और व्यस्त सड़कों पर पानी का छिड़काव धूल के कणों को हवा में उड़ने से रोकने में मदद करता है। वहीं, एंटी स्मॉग गन पानी की महीन बूंदों के जरिए हवा में मौजूद कुछ धूल कणों को नीचे बैठाने में सहायक होती है। इससे आसपास के क्षेत्र में धूल के प्रसार और लोगों के धूल के संपर्क में आने की आशंका कम हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन उपायों का प्रभाव तभी अधिक होगा, जब छिड़काव नियमित रूप से किया जाए और निर्माण सामग्री का उचित प्रबंधन सुनिश्चित हो। हालांकि, पानी का छिड़काव सभी प्रकार के वायु प्रदूषण को समाप्त नहीं कर सकता। वाहनों से निकलने वाले धुएं, अन्य उत्सर्जन और सूक्ष्म प्रदूषक कणों पर नियंत्रण के लिए भी अलग-अलग उपाय जरूरी हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए मेट्रो प्रणाली में भी कई प्रावधान
यूपीएमआरसी के अनुसार, मेट्रो परियोजना के निर्माण और संचालन में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कई तकनीकी उपाय किए गए हैं। मेट्रो ट्रेनों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जो ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न ऊर्जा के एक हिस्से को दोबारा उपयोग के लिए उपलब्ध कराती है। इससे ऊर्जा की खपत कम करने में मदद मिलती है।
इसके अतिरिक्त, ट्रेनों में वातानुकूलन व्यवस्था के बेहतर नियंत्रण के लिए एचवीएसी प्रणाली, जल संरक्षण के लिए वायडक्ट के नीचे रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट्स तथा मेट्रो परिसर में एलईडी लाइटिंग जैसे उपाय अपनाए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य ऊर्जा दक्षता बढ़ाना, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना और मेट्रो संचालन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है।
यातायात और सड़क की स्थिति सुधारने पर भी जोर
एमजी रोड पर यातायात को सुगम बनाए रखने के लिए सड़क की नियमित मरम्मत भी की जा रही है। निर्माण क्षेत्रों में सड़क की बेहतर स्थिति बनाए रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्षतिग्रस्त सतहों और जमा धूल से वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल दोबारा हवा में फैल सकती है। ऐसे में सड़क की मरम्मत, निर्माण स्थलों की सफाई और पानी का छिड़काव मिलकर धूल नियंत्रण में मदद कर सकते हैं।
पर्यावरण पर क्या पड़ेगा असर?
आगरा मेट्रो की ओर से किए जा रहे इन प्रयासों से निर्माण क्षेत्रों के आसपास धूल का स्तर कम करने, स्थानीय वायु गुणवत्ता में सुधार लाने और नागरिकों को धूल के संपर्क से होने वाली परेशानी घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे पैदल यात्रियों, दुकानदारों, वाहन चालकों और आसपास रहने वाले लोगों को विशेष राहत मिल सकती है।
दीर्घकालिक दृष्टि से मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने में योगदान दे सकती है। यदि अधिक लोग निजी कारों और दोपहिया वाहनों के बजाय मेट्रो का उपयोग करते हैं, तो प्रति यात्री परिवहन से होने वाले उत्सर्जन, ईंधन की खपत और सड़क यातायात के दबाव में कमी आ सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ यात्रियों की संख्या, बिजली उत्पादन के स्रोत और निजी वाहनों के उपयोग में होने वाली कमी पर निर्भर करेगा।
स्पष्ट है कि निर्माण के दौरान धूल नियंत्रण के उपाय तत्काल स्थानीय राहत देने में सहायक हैं, जबकि मेट्रो का व्यापक पर्यावरणीय लाभ इसके नियमित और अधिकाधिक उपयोग से जुड़ा है। ऐसे में नियमित छिड़काव, निर्माण सामग्री का सुरक्षित भंडारण, सड़कों की मरम्मत और प्रदूषण नियंत्रण के अन्य उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन आगरा को स्वच्छ एवं बेहतर शहरी परिवहन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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