करियर की दौड़, देर से मातृत्व और आनुवंशिक कारणों के बीच स्तन कैंसर बड़ी चुनौती

महिलाओं को जागरूक करने के लिए लुधियाना से बाहर अब मोगा एसपीएस हॉस्पिटल्स फैलाएगा जागरूकता
‘समय पर पहचान, सही परामर्श और जागरूकता से बच सकती हैं अनगिनत जिंदगियां’, मोगा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने दिया महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संदेश
सत्येन ओझा
मोगा/लुधियाना। एक महिला अपने परिवार की खुशियों के लिए दिन-रात मेहनत करती है। कभी वह बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी और कभी मां बनकर अपनों की दुनिया संवारती है। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों और करियर की भागदौड़ के बीच कई बार वह अपने ही स्वास्थ्य को पीछे छोड़ देती है। स्तन में होने वाले छोटे-से बदलाव को नजरअंदाज करना या किसी गंभीर बीमारी की आशंका से डरकर जांच न करवाना, कभी-कभी जिंदगी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। स्तन कैंसर के प्रति इसी डर को दूर करने, महिलाओं को समय रहते जागरूक करने और उन्हें सही चिकित्सा परामर्श तक पहुंचाने के उद्देश्य से एसपीएस हॉस्पिटल्स, लुधियाना ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।
हॉस्पिटल की ओर से होटल द रोसेल, मोगा में स्तन कैंसर के आधुनिक उपचार, शुरुआती पहचान और समय पर चिकित्सा के महत्व को लेकर स्वास्थ्य जागरूकता प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि स्तन कैंसर के खिलाफ लड़ाई केवल अस्पतालों और डॉक्टरों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए महिलाओं में जागरूकता, परिवार का सहयोग, सामाजिक भ्रांतियों से मुक्ति और समय पर चिकित्सकीय जांच की संस्कृति विकसित करना भी बेहद जरूरी है।
करियर की दौड़ में अपने स्वास्थ्य को न भूलें महिलाएं
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. प्रफुल्ल आर्य, डायरेक्टर—जनरल सर्जरी, और डॉ. संजमजोत सिंह, कंसल्टेंट—सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, ने स्तन कैंसर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की।
विशेषज्ञों ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं शिक्षा, करियर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपने स्वास्थ्य को पर्याप्त समय नहीं दे पातीं। देर से विवाह और अधिक उम्र में पहली गर्भावस्था जैसे कुछ प्रजनन संबंधी कारक भी स्तन कैंसर के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं। इसके अलावा आनुवंशिक कारण और पारिवारिक इतिहास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, स्तन कैंसर किसी एक कारण से नहीं होता और हर महिला के जोखिम का आकलन उसकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए।
महिलाओं के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि परिवार और करियर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए वे अपने शरीर के संकेतों को अनदेखा न करें। क्योंकि समय रहते उठाया गया एक छोटा-सा कदम बीमारी की पहचान और उपचार में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
शरीर के संकेतों को पहचानें, डर के कारण जांच से न भागें
डॉ. प्रफुल्ल आर्य ने बताया कि स्तन कैंसर के प्रभावी उपचार में शुरुआती पहचान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्तन में नई गांठ, आकार या बनावट में बदलाव, त्वचा पर असामान्य सिकुड़न या गड्ढा, निप्पल के आकार में परिवर्तन अथवा उससे असामान्य स्राव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उन्होंने महिलाओं को जागरूक करते हुए कहा कि किसी भी असामान्य बदलाव की स्थिति में योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए उचित चिकित्सकीय जांच जरूरी है। केवल डर, संकोच या सामाजिक झिझक के कारण जांच में देरी करना नुकसानदायक हो सकता है।
स्तन के प्रति जागरूकता का अर्थ अपने शरीर में होने वाले बदलावों को समझना है। महिलाएं स्वयं अपने स्तनों में किसी असामान्य परिवर्तन के प्रति सजग रह सकती हैं, लेकिन केवल स्वयं जांच करने से कैंसर की पुष्टि या उसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श तथा उपयुक्त स्क्रीनिंग भी आवश्यक है।
आधुनिक उपचार से लेकर सही निदान तक, हर मरीज के लिए अलग योजना
डॉ. संजमजोत सिंह ने स्तन कैंसर के उपचार में आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, सही निदान और विशेषज्ञों की टीम की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रत्येक मरीज की बीमारी की अवस्था, जांच के निष्कर्ष और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उपचार की योजना बनाई जाती है।
उपयुक्त मामलों में सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी या टार्गेटेड थेरेपी जैसी विधियों का उपयोग किया जा सकता है। कौन-सा उपचार आवश्यक होगा, इसका निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक जांच और बीमारी की स्थिति के आधार पर करते हैं।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि स्तन कैंसर को लेकर भय और भ्रांतियों में रहने के बजाय समय पर जांच करवाएं तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लें। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर कई मामलों में उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
लुधियाना से बाहर निकलकर मोगा और आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाएगा एसपीएस हॉस्पिटल्स
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे महत्वपूर्ण संदेश एसपीएस हॉस्पिटल्स की उस पहल से जुड़ा रहा, जिसके तहत अस्पताल लुधियाना से बाहर निकलकर मोगा और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की दिशा में काम करेगा।
अस्पताल का उद्देश्य केवल बीमारी के उपचार तक सीमित रहना नहीं, बल्कि महिलाओं तक ऐसी जानकारी पहुंचाना भी है, जिससे वे समय रहते अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो सकें, शुरुआती लक्षणों को पहचान सकें और आवश्यकता पड़ने पर सही चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त कर सकें।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ उनके प्रति जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। कई महिलाएं जानकारी के अभाव, सामाजिक संकोच, बीमारी के डर या परिवार की जिम्मेदारियों के कारण जांच टाल देती हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं को खुलकर अपने स्वास्थ्य पर बात करने और समय पर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
एसपीएस हॉस्पिटल्स का संकल्प है कि स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता को लुधियाना तक सीमित न रखते हुए आसपास के क्षेत्रों में भी पहुंचाया जाए, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और बीमारी की आशंका होने पर समय रहते विशेषज्ञों से संपर्क कर सकें।
‘महिलाएं परिवार की ताकत हैं, उनके स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं होनी चाहिए’
सुधीर ठाकुर, हेड—मार्केटिंग, एसपीएस हॉस्पिटल्स, लुधियाना, ने भी कार्यक्रम में भाग लेते हुए स्वास्थ्य जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों तक सही चिकित्सा जानकारी पहुंचाना तथा समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
स्तन कैंसर के खिलाफ यह लड़ाई केवल एक महिला की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की जिम्मेदारी है। जब परिवार की महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात कर सकेंगी, जब उन्हें जांच करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और जब बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियां दूर होंगी, तभी जागरूकता का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।
एसपीएस हॉस्पिटल्स, लुधियाना ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और विभिन्न स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज को जागरूक करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
संदेश स्पष्ट है—महिलाएं दूसरों की जिंदगी संवारते-संवारते अपनी जिंदगी को नजरअंदाज न करें। स्तन में किसी असामान्य बदलाव को छिपाएं नहीं, डरें नहीं और जांच में देरी न करें। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जागरूकता भी है और अपने जीवन के प्रति जिम्मेदारी भी।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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