मोगा में अवैध कॉलोनियों पर नगर निगम का शिकंजा, जेसीबी से ध्वस्त की गई प्लॉटिं

कैपिटल हॉस्पिटल के सामने विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी पर बिल्डिंग ब्रांच की कार्रवाई; बुग्गीपुरा चौक की कमर्शियल प्लॉटिंग का मामला भी सुर्खियों में
द बीट्स न्यूज़ नेटवर्क | मोगा।
मोगा शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच ने सख्त रुख अपना लिया है। इसी कड़ी में निगम अधिकारियों ने एक दिन पहले जालंधर बाईपास रोड पर बुग्गीपुरा चौकी के नजदीक कैपिटल हॉस्पिटल के सामने विकसित की जा रही एक कॉलोनी पर कार्रवाई करते हुए जेसीबी की मदद से वहां बनाई गई सड़क और प्लॉटिंग से संबंधित निर्माण को ध्वस्त कर दिया।
जानकारी के अनुसार, संबंधित कॉलोनाइजर ने उक्त जगह पर सड़क बनाकर प्लॉटिंग शुरू कर दी थी। नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बावजूद संबंधित कॉलोनाइजर न तो अधिकारियों के समक्ष पेश हुआ और न ही उसने कोई जवाब या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और अवैध रूप से विकसित की जा रही प्लॉटिंग को ध्वस्त कर दिया।
नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शहर में नियमों के विरुद्ध कॉलोनियां विकसित करने, बिना आवश्यक मंजूरी के प्लॉटिंग करने और निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और किसी की भी पहुंच कितनी ही बड़ी क्यों न हो, नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।
बुग्गीपुरा चौक की कमर्शियल प्लॉटिंग का मामला भी चर्चा में
दूसरी ओर, बुग्गीपुरा चौक के निकट की जा रही कमर्शियल प्लॉटिंग का मामला भी पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि नगर निगम ने इस प्लॉटिंग पर पहले ही रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया तथा कथित अनियमितताओं को लेकर कानूनी कार्रवाई भी शुरू हुई।
इस मामले में फरीदकोट निवासी वीनू गोयल की शिकायत पर शहर के प्रमुख व्यवसायी रिची नागी सहित छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक प्लॉट का बैनामा शिकायतकर्ता के नाम किए जाने के बाद उसे कथित तौर पर किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया। शिकायत के अनुसार, संबंधित जमीन पर प्लॉटिंग और बिक्री की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी, जबकि नगर निगम से आवश्यक मंजूरी लिए जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे।
मामले में कथित तौर पर शामिल लोगों की भूमिका और प्लॉटिंग से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई से उठे कई सवाल
शहर में सामने आ रहे इन मामलों ने अवैध कॉलोनियों और बिना आवश्यक मंजूरी के की जा रही प्लॉटिंग पर निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम ऐसे मामलों में कार्रवाई को किस तरह आगे बढ़ाता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जांच के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं।
द बीट्स न्यूज़ नेटवर्क
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