आगरा में एच आई वी नियंत्रण को मजबूत करने की पहल, स्वास्थ्य अधिकारियों को रोकथाम से लेकर उपचार तक का प्रशिक्षण
-जिला स्तरीय कार्यशाला में एचआईवी की शीघ्र पहचान, एआरटी उपचार
– आईवी-टीबी समन्वय और मरीजों के अधिकारों पर जोर; 95-95-95 लक्ष्य हासिल करने में मिलेगी मदद
द बीट्स न्यूज (विनोद गौतम)
आगरा। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम को जिला स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने और एचआईवी संक्रमण की रोकथाम, समय पर पहचान तथा उपचार सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से आगरा में जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को एचआईवी नियंत्रण की आधुनिक रणनीतियों, मरीजों की देखभाल और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य अधिकारियों को केवल कार्यक्रम संबंधी जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी व्यावहारिक समझ प्रदान करना भी था, जिससे एचआईवी संक्रमण की समय पर पहचान हो सके, संक्रमित व्यक्तियों को उपचार से जोड़ा जा सके और उपचार के दौरान उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
जांच, उपचार और संक्रमण की रोकथाम पर विशेष जोर
कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव तथा राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता की अध्यक्षता में कार्यक्रम संबंधी विषयों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर डिप्टी डीटीओ डॉ. एस.के. राहुल, जिला इम्यूनाइजेशन अधिकारी डॉ. उपेंद्र कुमार, डीसीएमओ डॉ. अमित कुमार, एसीएमओ डॉ. ऋषि गोपाल, डीसीएमओ डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, डीपीसी शशिकांत पोरवाल और एचआईवी-टीबी कोऑर्डिनेटर पंकज कुमार उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण सत्रों में मास्टर ट्रेनर एवं सीनियर मेडिकल ऑफिसर, पी-सीओई डॉ. नेहा गौर, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ उमेश रावतरे, कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफिसर नीरज श्रीवास्तव, दिशा टीम के सीपीएम पुरुषोत्तम तिवारी, सीएसओ रेनू बाला कौशल और डीएमडीओ दीप्ति सिंह ने प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया।
डॉ. सुखेश गुप्ता ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय एड्स एवं एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम की रणनीतिक प्राथमिकताओं से स्वास्थ्य अधिकारियों को अवगत कराना और जिला स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यावहारिक क्षमता विकसित करना है।
प्रशिक्षण के दौरान एचआईवी संक्रमण की वर्तमान स्थिति, जिला स्तर पर संक्रमण के रुझान, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की संरचना, एचआईवी एवं यौन संचारित संक्रमणों (एसटीआई) की जांच, परामर्श और उपचार सेवाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही सिफलिस प्रबंधन, मां से बच्चे में एचआईवी एवं सिफलिस संक्रमण की रोकथाम, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी), वायरल लोड की निगरानी और एचआईवी-टीबी सह-संक्रमण के प्रबंधन की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में उच्च जोखिम वाले समूहों तक रोकथाम सेवाएं पहुंचाने, लक्षित हस्तक्षेप, ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी और समुदाय आधारित एचआईवी नियंत्रण उपायों पर भी चर्चा हुई। एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के माध्यम से प्रतिभागियों को मरीजों के अधिकारों, गोपनीयता और भेदभाव रोकने के प्रति भी जागरूक किया गया।
प्रशिक्षण से क्या होगा फायदा?
इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि स्वास्थ्य अधिकारी एचआईवी संक्रमण के संभावित मामलों की पहचान, जांच के लिए उचित मार्गदर्शन और पुष्टि के बाद मरीजों को उपचार सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इससे मरीजों के उपचार शुरू करने में होने वाली देरी कम करने और नियमित फॉलो-अप को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
एचआईवी और टीबी के बीच संबंध को देखते हुए दोनों सेवाओं के बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया। इससे एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में टीबी की समय पर पहचान तथा टीबी से प्रभावित मरीजों में एचआईवी जांच और आवश्यक उपचार के समन्वय को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।
इसी तरह, वायरल लोड की नियमित निगरानी और एआरटी उपचार के महत्व की जानकारी से उपचार की निरंतरता पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। मरीजों की गोपनीयता और अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ने से भेदभाव कम करने तथा लोगों को बिना डर जांच और उपचार सेवाओं तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करने में भी मदद मिल सकती है।
कार्यशाला में केस स्टडी, प्रस्तुतियों, समूह चर्चाओं और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रशिक्षण को सहभागी बनाया गया। अंत में पोस्ट-ट्रेनिंग आकलन और प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे जिला स्तर पर एचआईवी कार्यक्रम के संचालन और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के बीच समन्वय को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।
95-95-95 लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 95-95-95 लक्ष्य का उद्देश्य एचआईवी से पीड़ित 95 प्रतिशत लोगों को अपनी संक्रमण स्थिति का पता होना, एचआईवी की पहचान हो चुके 95 प्रतिशत लोगों को एंटीरेट्रोवायरल उपचार मिलना तथा उपचार प्राप्त कर रहे 95 प्रतिशत लोगों में वायरल लोड का दमन सुनिश्चित करना है।
आगरा में आयोजित यह कार्यशाला इन लक्ष्यों की दिशा में स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता मजबूत करने का प्रयास है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण में मिली जानकारी को अस्पतालों, जांच केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं में कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों की बेहतर तैयारी, समय पर जांच, उपचार से जुड़ाव और नियमित निगरानी के माध्यम से एचआईवी संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने तथा प्रभावित व्यक्तियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
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