- चावल के नाम पर ‘जहर’ परोसने का आरोप,
- राइस मिलर्स की आवाज ने एफसीआई की व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
- द बीट्स न्यूज
- संगरूर। क्या सरकारी गोदामों में वर्षों से पड़ा चावल आम आदमी की थाली तक पहुंचकर उसकी सेहत के लिए खतरा बन रहा है? वॉयस ऑफ राइस मिलर्स ने चावल के भंडारण और वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि लंबे समय से गोदामों में पड़े पुराने चावल को सुरक्षित रखने के नाम पर बार-बार कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है, जबकि अपेक्षाकृत नया चावल पहले भेजा जा रहा है। वॉयस ऑफ राइस मिलर्स के संयोजक प्रमोद कुमार मोदी का कहना है कि यदि यह व्यवस्था इसी तरह जारी रही तो मामला सिर्फ सरकारी खाद्यान्न के खराब होने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर गरीब उपभोक्ताओं की सेहत पर पड़ सकता है। मोदी के अनुसार, वैज्ञानिकों की जानकारी के मुताबिक लंबे समय तक चावल का भंडारण करने के दौरान कीट नियंत्रण के लिए बार-बार कीटनाशकों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। उनका दावा है कि इससे चावल की खाद्य गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ लंबे समय तक इसके सेवन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हो सकती हैं। ‘पहले आया, पहले निकले’ नियम लागू करने की मांग वॉयस ऑफ राइस मिलर्स ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की भंडारण एवं वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए ‘पहले आया, पहले निकले’ के सिद्धांत को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की है। प्रमोद कुमार मोदी का आरोप है कि गोदामों में वर्ष 2023-24 का बड़ी मात्रा में चावल अभी भी पड़ा हुआ है, जबकि बाद के वर्षों यानी 2024-25 और 2025-26 का चावल आगे भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि पुराना चावल लंबे समय तक गोदामों में पड़ा रहेगा तो उसे सुरक्षित रखने के लिए लगातार कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ सकता है और इससे उसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े होंगे। अरबों का चावल खराब होने का दावा, गरीबों की थाली पर असर मोदी ने कहा कि एक तरफ सरकारी गोदामों में अरबों रुपये मूल्य का खाद्यान्न लंबे समय तक पड़े रहने से उसके खराब होने का खतरा है, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए गरीब परिवारों तक पहुंचने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुराने चावल को प्राथमिकता के आधार पर बाहर नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। उनके मुताबिक इसका आर्थिक नुकसान सरकार को और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का बोझ गरीब उपभोक्ताओं को उठाना पड़ सकता है। ‘खाद्यान्न की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं’ वॉयस ऑफ राइस मिलर्स के संयोजक प्रमोद कुमार मोदी ने कहा कि संगठन का गठन केवल चावल मिल मालिकों के हितों के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों के हित और स्वस्थ समाज की दिशा में आवाज उठाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने मांग की कि भारतीय खाद्य निगम को खाद्यान्न के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए पहले आए पुराने चावल को पहले बाहर निकालने की व्यवस्था लागू करनी चाहिए, ताकि सरकारी खाद्यान्न के नुकसान को कम किया जा सके और उपभोक्ताओं को लेकर उठ रही गुणवत्ता संबंधी चिंताओं का समाधान हो। उन्होंने कहा कि वॉयस ऑफ राइस मिलर्स इस मुद्दे को जनहित की मुहिम के रूप में आगे बढ़ाएगा और चावल की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था तथा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए आवाज उठाता रहेगा।
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कैप्शन: वॉयस ऑफ राइस मिलर्स के संयोजक प्रमोद कुमार मोदी चावल के भंडारण और वितरण व्यवस्था को लेकर जानकारी देते हुए।
