अमृतसर से पहली बार रेल के रास्ते देश के दक्षिणी बाजार पहुंचा पर्सिमोन

अमृतसर से पहली बार रेल के रास्ते देश के दक्षिणी बाजार पहुंचा पर्सिमोन
2,180 किलो फल मंगलुरू रवाना, पंजाब में फल उत्पादकों में जगी नई उम्मीद

सत्येन ओझा (द बीट्स न्यूज)

अमृतसर/फिरोजपुर, 5 अक्टूबर 2026।
अमृतसर रेलवे स्टेशन से फल परिवहन के क्षेत्र में रेलवे ने एक नई उपलब्धि दर्ज की है। फिरोजपुर मंडल के बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट के विशेष प्रयासों से पहली बार अमृतसर से पर्सिमोन फल की रेल मार्ग द्वारा आउटवर्ड लोडिंग की गई। इससे किसानों और फल व्यापारियों के लिए देश के दूर-दराज के बाजारों तक फल पहुंचाने का एक नया और अपेक्षाकृत किफायती विकल्प सामने आया है।
मंडल रेल प्रबंधक श्री संजीव कुमार के मार्गदर्शन में यह लोडिंग 4 अक्टूबर 2026 को ट्रेन संख्या 12484 अमृतसर–तिरुवनंतपुरम वीकली सुपरफास्ट एक्सप्रेस में की गई। इस ट्रेन के माध्यम से अमृतसर से 106 पैकेटों में कुल 2,180 किलोग्राम पर्सिमोन फल मंगलुरू जंक्शन के लिए भेजे गए।
रेलवे के अनुसार, फल एवं अन्य कृषि उत्पादों के लिए रेल परिवहन की सुविधा व्यापारियों को लंबी दूरी तक माल भेजने में मदद कर सकती है। विशेष रूप से ऐसे फल, जिन्हें समय पर बड़े बाजारों तक पहुंचाना जरूरी होता है, उनके लिए समयबद्ध और संगठित परिवहन व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
क्या होता है पर्सिमोन फल?
पर्सिमोन को भारत में आमतौर पर जापानी फल या अमरफल के नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Diospyros kaki है। यह मूल रूप से पूर्वी एशिया का फल है और भारत में इसकी खेती विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे ठंडे एवं उप-समशीतोष्ण क्षेत्रों में होती रही है।
पर्सिमोन देखने में टमाटर जैसा नारंगी रंग का फल होता है। पकने पर यह मीठा और मुलायम हो जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जिसके कारण देश के शहरी बाजारों में इसकी मांग बढ़ रही है।
अमृतसर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह शुरुआत?
इस उपलब्धि का सबसे बड़ा महत्व यह है कि अमृतसर अब पर्सिमोन जैसे विशिष्ट फल के लिए भी रेल-आधारित माल परिवहन का नया केंद्र बन सकता है। हालांकि उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के आधार पर अमृतसर में पर्सिमोन के वर्तमान उत्पादन की कोई प्रमाणित जिला-स्तरीय क्षमता उपलब्ध नहीं है।
भविष्य में यदि पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में पर्सिमोन की खेती तथा व्यापार बढ़ता है, तो अमृतसर रेलवे स्टेशन से देश के दूसरे हिस्सों तक इसकी नियमित ढुलाई से किसानों, फल व्यापारियों, आढ़तियों और लॉजिस्टिक्स कारोबार को फायदा मिल सकता है।
विशेष रूप से दक्षिण भारत के मंगलुरू जैसे बड़े बाजारों तक रेल के माध्यम से फल पहुंचने से लंबी दूरी के व्यापार के लिए एक नया परिवहन मार्ग खुलता है। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने और बड़े बाजारों तक कृषि उत्पाद पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
रेलवे का बढ़ता फोकस—किसानों से बाजार तक
फिरोजपुर मंडल लगातार नए माल यातायात को रेलवे से जोड़ने की दिशा में प्रयास कर रहा है। इससे पहले भी मंडल ने पर्सिमोन की रेल ढुलाई को लेकर पहल की थी; सितंबर 2026 में लुधियाना से हावड़ा तक पर्सिमोन की खेप रेल से भेजी गई थी।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक/फ्रेट परमदीप सिंह सैनी के अनुसार, फिरोजपुर मंडल की विश्वसनीय और समयबद्ध माल परिवहन व्यवस्था व्यापारियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध करा रही है। मंडल का उद्देश्य माल यातायात बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सेवाओं को प्रोत्साहित करना भी है।
अमृतसर से पर्सिमोन की यह पहली रेल खेप केवल 2,180 किलो फल की ढुलाई नहीं, बल्कि पंजाब के फल व्यापार को देश के दूर-दराज के बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
अमृतसर में इन फलों का होता है उत्पादन
उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में अमृतसर की प्रमुख फलों की सूची में पर्सिमोन का उल्लेख नहीं मिलता और पंजाब के केंद्रीय कृषि क्षेत्र में अमृतसर के लिए सामान्यतः नाशपाती, अमरूद, अंगूर, आड़ू, आम, किन्नू आदि फलों की सिफारिश की गई है। इसके बावजूद पर्सिमोन अब नई उम्मीद बनकर उभरा है।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
7087570105

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