
-50 से 80 वर्ष पुराने विद्यार्थियों कैंपस में पहुंचकर पुरानी यादों में खोये दिखे
-पाहवा परिवार ने बच्चों के लिए स्थायी स्कॉलरशिप शुरू करने की जताई इच्छा
सत्येन ओझा (द बीट्स न्यूज)
मोगा। सौ वर्ष केवल समय का पड़ाव नहीं होते, बल्कि वे हजारों-लाखों जिंदगियों की यादों, संघर्षों, संस्कारों और उपलब्धियों का इतिहास होते हैं। मोगा के प्रतिष्ठित डी.एम. कॉलेज में 9 अक्टूबर को कुछ ऐसा ही भावुक और गौरवशाली दृश्य देखने को मिला, जब संस्थान ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर शताब्दी समारोह आयोजित किया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन पीढ़ियों के पुनर्मिलन का अवसर बन गया, जिनकी जिंदगी की बुनियाद इसी शिक्षण संस्थान में रखी गई थी।
वर्ष 1926 में पद्मश्री राय बहादुर डॉ. मथुरा दास पाहवा द्वारा स्थापित डी.एम. कॉलेज ने एक सदी के दौरान अनगिनत विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ जीवन के संस्कार दिए। आज इसके विद्यार्थी देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं। शताब्दी समारोह में जब 50 से 80 वर्ष पहले कॉलेज में पढ़ चुके पूर्व विद्यार्थी परिसर में पहुंचे, तो उनके लिए यह केवल पुरानी इमारतों को देखने का अवसर नहीं था। यह अपने जीवन के उस दौर में लौटने जैसा था, जहां से उनके सपनों ने उड़ान भरी थी।
कई पूर्व विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी, आंखों में पुरानी यादों की चमक और बातचीत में बीते दिनों का जिक्र साफ दिखाई दिया। वही परिसर, वही संस्थान और वही यादें—जिन्होंने कभी उनके भविष्य की दिशा तय की थी। उम्र के लंबे सफर के बाद अपने शिक्षण संस्थान में लौटे इन विद्यार्थियों के लिए शताब्दी समारोह जिंदगी के सबसे यादगार पलों में शामिल हो गया।
कालेज में मिले सम्मान से भावुक दिखा पाहवा का परिवार
शताब्दी समारोह का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक पक्ष संस्थापक पद्मश्री डॉ. मथुरा दास पाहवा के परिवार की उपस्थिति रही। उनके पौत्र डॉ. दीपक पाहवा, प्रिय पाहवा, विजय पाहवा, अरुण पाहवा और परिवार की सदस्य आनंदिता पाहवा ने समारोह में विशेष रूप से शिरकत की।
पाहवा परिवार ने इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्हें आमंत्रित करने, सम्मान देने और डॉ. मथुरा दास पाहवा की विरासत को स्मरण करने के लिए कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. ललित मोहन गर्ग तथा कॉलेज स्टाफ का दिल की गहराइयों से आभार व्यक्त किया। परिवार के सदस्यों ने कहा कि कॉलेज परिसर में मिला सम्मान उनके लिए बेहद भावुक और अविस्मरणीय अनुभव है।
विरासत इमारतों में नहीं, विद्यार्थियों के जीवन में होती है
डॉ. दीपक पाहवा ने अपने संबोधन में अपने दादा डॉ. मथुरा दास पाहवा के जीवन से जुड़े कई ऐसे अनछुए पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने उनके जीवन, दूरदृष्टि, सेवा भावना और शिक्षा के प्रति समर्पण को याद करते हुए बताया कि किसी शिक्षण संस्थान की वास्तविक विरासत केवल उसकी इमारतों में नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों के जीवन में होती है, जिन्हें वह बेहतर इंसान बनने का अवसर देता है।
डॉ. दीपक पाहवा ने प्रिंसिपल प्रोफेसर ललित मोहन गर्ग और पूरे स्टाफ को इस आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह समारोह परिवार के लिए कभी न भूलने वाली याद बन गया है।
इसी भावनात्मक जुड़ाव को आगे बढ़ाते हुए पाहवा परिवार ने कॉलेज के विद्यार्थियों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करने की इच्छा भी व्यक्त की। परिवार की ओर से कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए स्थायी स्कॉलरशिप शुरू करने का प्रस्ताव रखा, ताकि जरूरतमंद और प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ने में सहायता मिल सके। इस संबंध में प्रिंसिपल प्रोफेसर ललित मोहन गर्ग से चर्चा करके जल्द ही योजना को अमली रूप देने की इच्छा जताई गई।
पाहवा परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि वे कॉलेज के विकास और विद्यार्थियों के हित में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। यदि यह पहल आगे बढ़ती है, तो यह संस्थापक परिवार की ओर से अपनी विरासत को शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम होगा।
समारोह में वैदिक संस्कृति की झलक, परिसर बना संस्कारों का केंद्र
डीएम कॉलेज का शताब्दी समारोह अपनी भव्यता के साथ-साथ भारतीय परंपरा और वैदिक संस्कृति के रंग में भी रंगा नजर आया। कॉलेज के स्वागत द्वार से लेकर यज्ञशाला तक ओम के प्रतीक चिह्नों और वैदिक परंपराओं की झलक दिखाई दी। पूरे परिसर में ऐसा वातावरण तैयार किया गया, जिसने संस्थान के ऐतिहासिक गौरव को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़ दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हवन-यज्ञ से हुआ
डॉ. मथुरा दास पाहवा के परिवार के सदस्यों, कॉलेज के रिसीवर एवं एसडीएम मोगा सरदार सतविंदर सिंह, प्रिंसिपल प्रोफेसर ललित मोहन गर्ग और वाइस प्रिंसिपल मंजू ढंड सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने ज्योति प्रज्वलित कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। डॉ. बलविंदर कुमार, पुरोहित दिवाकर भारती और आचार्य सुनील कुमार शास्त्री ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर हवन यज्ञ में आहुतियां डलवाईं?
समारोह में वैदिक संस्कृति का यह स्वरूप केवल सजावट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व का संदेश भी दिया। शताब्दी वर्ष के इस अवसर पर संस्थान की ऐतिहासिक यात्रा और भारतीय परंपराओं के बीच एक सुंदर समन्वय देखने को मिला।
एकेडमिक वेल्यूज का संदेश
समारोह में कॉलेज के रिसीवर एवं एसडीएम सरदार सतविंदर सिंह की भूमिका भी विशेष रूप से चर्चा में रही। वह पूरे कार्यक्रम के दौरान बेहद साधारण और सहज व्यक्तित्व में नजर आए। उन्होंने कॉलेज के एकेडमिक नेतृत्व को प्रमुखता देते हुए प्रिंसिपल प्रो.ललित मोहन गर्ग को कार्यक्रम के केंद्र में रखा।
उनकी इस कार्यशैली से शिक्षा संस्थानों में अकादमिक नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन का संदेश सामने आया।
डीसी ने हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया
डीसी सागर सेतिया ने की संस्थान की सराहना, प्रशासन की ओर से सहयोग का भरोसा
डीसी सागर सेतिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने डी.एम. कॉलेज को एक महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान बताते हुए कहा कि ऐसे संस्थान समाज में ज्ञान और जागरूकता का प्रकाश फैलाने का कार्य करते हैं। उन्होंने कॉलेज के स्टाफ सदस्यों को पूरी मेहनत और समर्पण से काम करते रहने के लिए प्रेरित किया। साथ ही प्रशासन की ओर से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया।
डॉ.पाहवा पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे
प्रिंसिपल प्रोफेसर ललित मोहन गर्ग ने अपने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों का अभिनंदन किया और डॉ. मथुरा दास पाहवा के जीवन तथा उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाजसेवा और शिक्षा के प्रति अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले ऐसे व्यक्तित्व विरले ही जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. पाहवा की सोच और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
पूर्व विद्यार्थियों का सम्मान
समारोह में पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पूर्व विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इन पूर्व विद्यार्थियों ने शिक्षा, साहित्य, चिकित्सा, व्यापार और उद्योग सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले उपन्यासकार बलदेव सिंह सड़कनामा सहित कई प्रतिष्ठित पूर्व विद्यार्थियों सफल उद्यमी एवं राइस मिलर रविंदर गोयल सीए, बासमती चावल के जाने-माने निर्यातक नरेश कुमार गोयल किट्टू, राधेश सिंगल तथा चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रसिद्ध नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. अनुज थापर, डॉ.नीलू थापर और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता थापर को भी डी.एम. कॉलेज के पूर्व विद्यार्थी के रूप में सम्मान प्रदान किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
समारोह के दौरान कॉलेज के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह और उल्लास का वातावरण बनाया। एक ओर वर्तमान पीढ़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही थी, तो दूसरी ओर पूर्व विद्यार्थी अपने पुराने संस्थान की उपलब्धियों और बदलते स्वरूप को देखकर गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल मंजू ढंड ने सभी अतिथियों, पाहवा परिवार, पूर्व विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन प्रोफेसर गुरप्रीत सिंह घाली ने किया।
जब पांच, छह, सात या आठ दशक पहले पढ़ चुके विद्यार्थी अपने पुराने कॉलेज में लौटे, तो उनके साथ केवल उनकी वर्तमान उपलब्धियां नहीं आईं, बल्कि वे अनगिनत यादें भी लौटकर आईं, जो उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्षों से जुड़ी थीं। ऐसे अवसर यह याद दिलाते हैं कि शिक्षा का रिश्ता डिग्री मिलने के साथ समाप्त नहीं होता; वह जीवनभर व्यक्ति की पहचान और भावनाओं का हिस्सा बना रहता है।
द बीट्स न्यूज नेटवर्क
708757015
